सदर अस्पताल के सिविल सर्जन का विवादित बयान,मामले ने पकड़ा तूल
सदर अस्पताल में पदस्थापित डाक्टर अरविंद केशरी को बताया गया महाफर्जी,डिप्रेशन में डाॅ केशरी
डीएस को पत्र लिखकर डाॅ अरविंद केशरी गए आकस्मिक अवकाश पर
खड़ा किया सवाल,अगर फर्जी डिग्री प्रूफ नहीं हुई तो क्या सीएस व जांच टीम में शामिल पदाधिकारी देंगे इस्तीफा
प्रतिनिधि,चतरा। चतरा के एमएस नर्सिंग होम में फर्जी चिकित्सक द्वारा गलत इलाज से मरीज की मौत मामले में उपायुक्त के निर्देश पर नर्सिंग होम को सील करने की कार्रवाई के बाद सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डाॅ जगदीश प्रसाद के निर्देश पर अन्य नर्सिंग होम व क्लीनिक की जांच को लेकर गठित जांच टीम की रिपोर्ट के बाद दिए गए एक बयान ने बाद जिला के सरकारी चिकित्सकों में उबाल है।
दो दिन पूर्व सीएस द्वारा सदर अस्पताल चतरा में पदस्थापित एक चिकित्सक डाॅ अरविंद केशरी को भी फर्जी नहीं महाफर्जी करार दे दिया गया। सीएस के फर्जी नहीं महाफर्जी वाले बयान के बाद डाॅ अरविंद केशरी डिप्रेशन में हैं और डीएस को पत्र लिखकर इलाज के लिए लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। डाॅ अरविंद केशरी ने मीडिया को जारी बयान में बताया है कि वह पिछले पांच वर्षो से सदर अस्पताल चतरा में कार्य कर रहे हैं। पूरी इमानदारी से चतरा के लोगों को सेवा किया हूं। मेरी ज्वाइनिंग 2019 में हुई थी। उन्होंने कहा है कि मैं लिपदा मोड़ के पास अस्पताल में ड्यूटी अवधि के बाद अपना क्लीनिक में मरीजों का इलाज करता हूं। मेरे क्लीनिक का क्लिनिकल एस्टेबलिस्टमेंट भी हुआ है। इसके बावजूद मेरे क्लीनिक में किसी जांच टीम के आए बगैर मुझे महाफर्जी डॉक्टर घोषित कर दिया गया,जिससे सुनकर मेरी तबियत के साथ मानसिक तनाव उत्पन्न हो गई है। डाॅ अरविंद केशरी ने सिविल सर्जन चतरा से निवेदन किया है की टीम गठन कर मेरी डिग्री को जांच कराया जाए अगर मेरी डिग्री किसी भी तरीके से गलत पाया गया तो खुद इस्तीफा दे दूंगा। साथ ही यह भी सवाल खड़ा किया और कहा है कि अगर जांच उनकी डिग्री फर्जी नहीं पाई गई तो क्या सिविल सर्जन और जांच टीम भी इस्तीफा देंगे। डाॅ अरविंद केशरी ने कहा कि सदर अस्पताल में कार्यरत एक डॉक्टर के डिग्री पर सवाल खड़ा करके ये ना सिर्फ मेरा बल्कि पूरे हेल्थ सिस्टम का अपमान किया गया है।





