रांची।झारखंड राजभवन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सदस्यता रद होने के मामले में सस्पेंस बढ़ा दिया है। आफिस आफ प्राफिट मामले में हेमंत की विधानसभा की सदस्यता रद होना तो तय है लेकिन इसे लेकर शनिवार को भी निर्वाचन आयोग को राज्यपाल रमेश बैस का आदेश नहीं भेजा जा सका। बताया जाता है कि इसमें दो-तीन दिनों का और समय लग सकता है। आयोग की अनुशंसा के बाद भी सदस्यता रद करने में क्यों देरी हो रही है, इसपर राजभवन द्वारा अधिकृत रूप से कोई जानकारी नहीं दी गई है।
राज्यपाल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को विधायकी से अयोग्य करने वाला अपना आदेश शनिवार को भी जारी नहीं किया।आशंका है कि ये आदेश जल्द ही आयोग को भेजा जाएगा। बताया जा रहा है कि राज्यपाल अभी चुनाव आयोग के परामर्श का वैधानिक पहलुओं का अध्ययन करा रहे हैं। इसके बाद वे अपने आदेश को भारत निर्वाचन आयोग को (ईसीआई) को भेजेंगे।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक राज्यपाल की ओर से हेमंत सोरेन की अयोग्यता से संबंधित आदेश ईसीआई को भेजा जाएगा। राज्यपाल के आदेश के आधार पर आयोग बतौर विधायक हेमंत सोरेन को अयोग्य साबित होने के कारण बरहेट विधानसभा की सीट खाली होने की अधिसूचना जारी करेगा और इसकी जानकारी झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजेगा। यहां से सूचना झारखंड विधानसभा अध्यक्ष को दी जाएगी। इस प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होने की जानकारी नही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक निर्वाचन आयोग ने हेमंत सोरेन को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 9 (ए) के तहत दोषी मानते हुए उन्हें विधायक के पद से अयोग्य किए जाने का मंतव्य राज्यपाल को दो दिन पहले गुरुवार को सौंप दिया है। सूत्रों के अनुसार, शनिवार देर शाम तक राज्यपाल ने हेमंत सोरेन को विधायक से अयोग्य घोषित किए जाने के आदेश पर हस्ताक्षर नहीं किया था। राज्यपाल अपना आदेश कब जारी करेंगे इसकी आधिकारिक रूप से जानकारी नहीं दी गई है।
चुनाव आयोग से मिले अनुशंसा और राज्यपाल द्वारा हेमंत सोरेन की सदस्यता पर सस्पेंस के बीच हेमंत सोरेन के आदिवासी कार्ड पर भारतीय जनता पार्टी विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने शनिवार को कमान संभाली। गिरिडीह में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में भाग ले रहे बाबूलाल मरांडी ने एक के बाद एक पांच ट्वीट किए जिसमें सबसे पहले कहा कि हम भी आदिवासी हैं,लेकिन लुटेरे नहीं हैं। सीएम सोरेन पर भ्रष्टाचार के आरोपों पर बाबूलाल मरांडी ने ट्वीट करते हुए झारखंड को लूट का चारागाह बनाने वाला बता दिया। मुख्यमंत्री के आदिवासी होने से डीएनए में डर नहीं होने वाले बयान पर भी बाबूलाल ने कटाक्ष किया।
तीन दिनों से जारी अनिश्चितता के बीच भारतीय जनता पार्टी ने आदिवासी मुद्दे पर संभलकर चलने का फैसला किया है। बाबूलाल मरांडी के कद को देखते हुए उन्हें ही आगे कर पार्टी हेमंत सोरेन को जवाब देने में लगी है। भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने भी इस मामले प्रदेश नेतृत्व को मरांडी को आगे रखने की सलाह दी है। राज्यपाल के निर्णय के बाद अगर झारखंड की सरकार में कोई बड़ा फेरबदल नहीं होता है तो पार्टी संगठन की कमान भी बाबूलाल मरांडी को सौंपी जा सकती है। हालांकि प्रदेश के नेता मान रहे हैं कि चुनाव आयोग और राज्यपाल के निर्णय के बाद राज्य में हेमंत सोरेन का सरकार में बने रहना मुश्किल है।





