रांची।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रहेंगे कि जाएंगे तमाम राजनीतिक उलटफेर की आशंकाओं के बीच झारखंड के गर्वनर रमेश बैस ने रायपुर में बड़ा बयान दिया है। गर्वनर ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सदस्यता के मामले में चुनाव आयोग से उन्होंने सेकेंड ओपिनियन मांगा है।इसके मिलते ही वह निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं। ये उनका विशेषाधिकार है।बता दें कि हेमंत सोरेन की विधानसभा की सदस्यता को लेकर ऊहापोह की स्थिति पिछले दो महीने से बनी हुई है।
आदेश की प्रतिलिपि देने का प्रावधान नहीं है
दीपावली पर अपने घर गए गवर्नर ने एक निजी चैनल से बातचीत में कहा कि पद संभालने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से संबंधित शिकायत मिली थी जो चुनाव से संबंधित थी। इसलिए हमने चुनाव आयोग को पत्र भेज मंतव्य मांगा। मंतव्य मिलने के बाद गवर्नर बाध्य नहीं है कि कब आर्डर जारी करे। उनके पास आयोग का पत्र आते ही सियासी हलचल चालू हो गई। घबराने की कोई बात नहीं है। जो होना है, वह होगा। मीडिया में कई अटकलें लगाई गईं। मेरे पास झामुमो का प्रतिनिधिमंडल आया। उसने आयोग के पत्र की कॉपी मांगी। आदेश की प्रतिलिपि देने का प्रावधान नहीं है। इस संबंध में अपील को आयोग ने भी अस्वीकार कर दिया।
झारखंड में कभी भी फूट सकता है एटम बम
दीवाली की चर्चा आगे कर गर्वनर रमेश बैस ने एक निजी न्यूज चैनल से बातचीत में कहा कि दिल्ली में पटाखे प्रतिबंधित हैं, लेकिन झारखंड में पटाखा बैन नहीं हैं। कभी भी एटम बम फूट सकता है। गर्वनर का यह बयान झारखंड के सियासी घटनाक्रम के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में सरकार को अस्थिर करने की उनकी कोई मंशा नहीं है।
सरकार को अस्थिर करने की कोई मंशा नहीं
सत्तापक्ष के आरोपों और रायपुर में झारखंड के विधायकों को रखने से जुड़े सवाल पर गर्वनर ने कहा कि सरकार को अस्थिर करने की अगर उनकी मंशा होती तो आयोग की सिफारिश पर निर्णय ले चुके होते,लेकिन वह बदला लेने या बदनाम करने की भावना से काम नहीं करते। वह संवैधानिक पद पर हैं और उन्हें संविधान की रक्षा करनी है। यही कारण है कि उन्होंने चनाव आयोग से सेकेंड ओपिनियन मांगा है। ऐसा इसलिए भी किया कि कोई उनपर अंगुली न उठाए।
मुख्यमंत्री और सरकार का प्रतिनिधिमंडल मिल चुका है।
मंतव्य की प्रति नहीं मिली। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री, झामुमो, यूपीए प्रतिनिधिमंडल गर्वनर से आयोग के मंतव्य की प्रति मांग चुके हैं।सीएम ने वकीलों के माध्यम से भी मंतव्य की जानकारी मांगी थी,लेकिन आयोग ने इसे दो संवैधानिक संस्थाओं के बीच का मामला बताते हुए देने से मना कर दिया। यूपीए के विधायक दल ने पत्रकार वार्ता कर यहां तक आशंका जाहिर कर दी है कि गर्वनर फैसला लेने में देरी कर विधायकों की खरीद फरोख्त को हवा दे रहे हैं। इसके बाद गर्वनर ने एक कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा था कि आयोग का लिफाफा इतना जोर से चिपका है कि खुल ही नहीं रहा है। सीएम ने हाल में पत्रकारों से वार्ता के दौरान यहां तक कहा कि यदि वह दोषी हैं तो उन्हें सजा दी जाए।
सत्तापक्ष और विपक्ष गर्वनर के बयान पर क्या बोला
गर्वनर के हालिया बयान को लेकर झारखंड की अलग-अलग पार्टियों की ओर से प्रतिक्रिया आई है। झामुमो नेता विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि दोबारा मंतव्य मांगना संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। लगता है कि मामले को मैन्युप्लेट करने की साजिश चल रही है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा कि राज्यपाल का निर्णय संवैधानिक कार्य है। इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं। सभी पार्टियों को संवैधानिक निर्णयों का सम्मान करना चाहिए। कांग्रेस प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि राज्यपाल संवैधानिक पद पर हैं। उन्हें जितना ओपिनियन लेना है लें, पर मीडिया में बयानबाजी ना करें। राजभवन को सियासी अखाड़ा नहीं बनाना चाहिए
चुनाव आयोग ने 25 अगस्त को सौंपा है मंतव्य
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम खनन लीज मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद चुनाव आयोग ने 25 अगस्त को अपना मंतव्य राजभवन को सौंपा। मामले में भाजपा नेताओं ने गर्वनर से शिकायत कर सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। इस आधार पर गर्वनर ने आयोग से मंतव्य मांगा था। आयोग ने मुख्यमंत्री और भाजपा के साथ सुनवाई के बाद मंतव्य राजभवन को सौंपा। गर्वनर का अब तक निर्णय नहीं आने से राज्य में सियासी संशय की स्थिति है।
हेमंत सोरेन की सदस्यता से जुड़ा महत्वपूर्ण घटनाक्रम
11 फरवरी - गर्वनर रमेश बैस से भाजपा नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा पत्थर खनन लीज लेने संबंधी दस्तावेज सौंपे। कार्रवाई की मांग की। राज्यपाल ने चुनाव आयोग से मंतव्य मांगा।
दो मई - चुनाव आयोग ने विशेष दूत के जरिए मुख्यमंत्री आवास पर नोटिस सौंपा। पूछा गया कि क्यों नहीं उनके खिलाफ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य करार देने की कार्रवाई की जाए। आयोग ने 10 मई तक पक्ष रखने का निर्देश दिया।
नौ मई - मुख्यमंत्री ने मां की बीमारी और हैदराबाद में इलाज की जानकारी देकर अतिरिक्त समय मांगा। आयोग ने 10 दिनों का वक्त दिया।
20 मई - हेमंत सोरेन का जवाब, रांची के अनगड़ा मौजा में 88 डिसमिल जमीन की माइनिंग लीज 17 मई 2008 को दस साल के लिए दिया गया था। वर्ष 2018 में उन्होंने नवीकरण के लिए आवेदन दिया था, लेकिन आवेदन अस्वीकृत हो गया। वर्ष 2021 में नए सिरे से माइनिंग लीज के लिए आवेदन मांगा। नियमों का पालन करते हुए माइनिंग लीज दिया गया। खनन करने की अनुमति (सीओटी) नहीं मिलने पर उन्होंने बगैर खोदाई किए लीज सरेंडर कर दिया। उनके पास कोई माइनिंग लीज नहीं है।जब उनसे आयोग ने स्पष्टीकरण मांगा तो उनके पास कोई खनन लीज नहीं था।
14 जून - मां की बीमारी और राज्यसभा चुनाव में व्यस्तता का हवाला देते हुए आयोग से वक्त मांगा, आयोग ने 28 जून का समय दिया।
28 जून - भाजपा की तरफ से पक्ष रखा गया। हेमंत सोरेन को 14 जुलाई का समय दिया गया।
14 जुलाई - आयोग के समक्ष हेमंत सोरेन के वकील ने पक्ष रखा। आयोग ने सुनवाई पांच अगस्त के लिए स्थगित कर दी।
12 अगस्त : दोनों पक्षों की तरफ से बहस पूरी होने के बाद आयोग ने सुनवाई समाप्त की। दोनों पक्ष से 18 अगस्त तक लिखित जवाब देने को कहा।
25 अगस्त : चुनाव आयोग ने विशेष दूत के माध्यम से राज्यपाल को मंतव्य भेजा।
29 अगस्त : विधायकों को एकजुट रखने की कवायद, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विधायकों के साथ खूंटी के लतरातू डैम पहुंचे।
30 अगस्त : सत्ताधारी गठबंधन के अधिकांश विधायक विशेष विमान से रायपुर गए और वहां पंचसितारा रिसार्ट में ठहरे।
एक सितंबर : यूपीए का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला। गर्वनर से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। गर्वनर ने कहा कि वे जल्द स्पष्ट करेंगे।
दो सितंबर : गर्वनर का दिल्ली प्रवास।
पांच सितंबर : विधानसभा के विशेष सत्र में हेमंत सरकार ने हासिल किया विश्वास मत।





