अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने से जारी शांति की उम्मीदें अब पूरी तरह धराशायी हो चुकी हैं। रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा पर एक बार फिर बड़ा खतरा मंडराने लगा है। हाल ही में ओमान के खसाब शहर से 17 समुद्री मील (लगभग 31 किलोमीटर) पूर्व में होर्मुज से बाहर निकल रहे एक तेल टैंकर को 3 अज्ञात प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाया गया।
ब्रिटेन की यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) की पुष्टि के अनुसार, राहत की बात यह है कि इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ है और न ही समुद्र में तेल के रिसाव या पर्यावरण को नुकसान की सूचना है। हालांकि, एक साथ तीन प्रोजेक्टाइल से हमला यह साफ दर्शाता है कि कमर्शियल शिपिंग के खिलाफ हिंसा की तीव्रता अचानक काफी बढ़ गई है।
होर्मुज संघर्ष से जुड़ी प्रमुख घटनाएं
| घटना / पक्ष | विवरण व प्रभाव |
| टैंकर पर हमला (UKMTO चेतावनी) | ओमान के खसाब के पास 3 अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला। कोई हताहत या तेल रिसाव नहीं। |
| अमेरिका की कार्रवाई | ईरान के लराक द्वीप पर मिसाइल और सी-माइन लॉन्चर्स पर 3 बार हवाई हमला। |
| ईरान का पलटवार | जॉर्डन, यूएई, कतर, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। |
| ग्लोबल अलर्ट | UKMTO ने क्षेत्र से गुजरने वाले सभी जहाजों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी। |
सीजफायर की उम्मीदें खत्म: हमले और जवाबी प्रहार
- लराक द्वीप पर अमेरिकी प्रहार: अमेरिका ने दावा किया कि ईरानी सेना (IRGC) होर्मुज में समुद्री सुरंगें (sea mines) बिछाने और अमेरिकी ठिकानों पर हमले की योजना बना रही थी, जिसे नाकाम करने के लिए लराक द्वीप पर उनके 2 मिसाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म्स को तबाह कर दिया गया।
- ईरान का ताबड़तोड़ मिसाइल अटैक: अमेरिकी हमले के तुरंत बाद ईरानी सेना ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी बेस समेत यूएई, बहरीन और कतर में बने अमेरिकी सैन्य परिसरों को निशाना बनाकर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।
- ट्रंप की विध्वंसक चेतावनी: हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को विनाशकारी सैन्य कार्रवाई की नई चेतावनी जारी कर दी है, जिससे मध्य पूर्व का संकट नए चरम पर पहुंच गया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। इस तरह के लगातार हमलों के बाद समुद्री व्यापार और तेल की आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह खतरे में पड़ गई है। अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर बढ़ते जोखिम के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने और जहाजों के बीमा प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।





