रांची।भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाकर देश की दस फीसदी जनजातीय समुदाय के बीच सशक्त संदेश दिया है।हाशिए की नोक पर रहे इस बड़े जनसमुदाय के बीच द्रौपदी मुर्मू की उम्मीदवारी से उम्मीदें बंधी हैं। पहली बार आदिवासी राष्ट्रपति बनने पर पंचायत एक्सटेंशन टू शिड्यूल्ड एरिया एक्ट 1996 कानून के सशक्त बनने, जनगणना प्रपत्र में सरना धर्मकोड, पांचवीं और छठीं अनुसूची के राज्यों के साथ केंद्र सरकार का समन्वय प्रभावशाली बन सकेगा।





2011 की जनगणना के मुताबिक देश में लगभग 12 करोड़ जनजातीय लोग हैं। पांचवीं और छठीं अनुसूची के राज्यों में इनकी सशक्त मौजूदगी है।सियासी पंडितों की मानें तो द्रौपदी मुर्मू की उम्मीदवारी से भारतीय जनता पार्टी को पांचवीं और छठीं अनुसूची के राज्यों में जनजातीय वोट में सेंध लगाने में कामयाबी मिलेगी।छठीं अनुसूची के राज्यों असम,मेघालय, त्रिपुरा, मिज़ोरम में जनजातीय समाज के लोग काफी संख्या में हैं। असम में 12 फीसदी,त्रिपुरा में 31 फीसदी, मेघालय में 86 फीसदी और मिजोरम में 95 फीसदी से अधिक इस समुदाय के लोग हैं।





वहीं पांचवी अनुसूची के राज्यों में झारखंड में लगभग 27 फीसदी आदिवासी हैं।छत्तीसगढ़ में 30 फीसदी, मध्यप्रदेश में 21फीसदी, ओड़िशा में 22.85 फीसदी, राजस्थान में 13.48 फीसदी, गुजरात में 8फीसदी, पश्चिम बंगाल में 5.8फीसदी,हिमाचल प्रदेश में 5.7 फीसदी आबादी है।भारतीय जनता पार्टी की नजर ओड़िशा, राजस्थान,झारखंड, छत्तीसगढ़ पर गड़ी है।





भारतीय जनता पार्टी को देश में पांचवीं और छठीं अनुसूची के राज्यों में क्षेत्रीय दल चुनौती दे रहे हैं।आंध प्रदेश में वाईएसआरसीडी,झारखंड में झामुमो,ओड़िशा में बीजू जनता दल,पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को फतह करने के लिए भारतीय जनता पार्टी आदिवासी समाज को जोड़ने की कवायद में है। जल, जंगल, ज़मीन पर जनजातियों का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए पेसा कानून लागू किया गया है,लेकिन इससे आदिवासियों को खास लाभ नहीं हुआ।





रांची विश्वविद्यालय के पूर्व डीन सामाजिक विज्ञान संकाय सह मानवशास्त्री डॉ. करमा उरांव के मुताबिक द्रौपदी मुर्मू निष्पक्ष निर्णय लेती हैं। इसकी मिसाल रघुवर की पिछली सरकार में सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन के प्रस्ताव को लौटाकर कर पेश कर चुकी हैं। उनके राष्ट्रपति बनने से पेसा कानून प्रभावी होगा। सरना धर्मकोड को लेकर भी पहल की उम्मीद बंधी है।