नई दिल्ली। छोटे पर्दे पर 'शक्तिमान' बनकर बच्चों के सुपरहीरो और महाभारत में 'भीष्म पितामह' की कालजयी भूमिका निभाने वाले दिग्गज अभिनेता मुकेश खन्ना आज 67 वर्ष के हो चुके हैं। पर्दे पर अपने सिद्धांतों के लिए अडिग रहने वाले खन्ना निजी जीवन में भी उतने ही स्पष्टवादी हैं। हाल ही में एक बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी शादी न करने की असली वजह साझा की, जिसने प्रशंसकों के बीच एक नई चर्चा छेड़ दी है।
'मर्द' की परिभाषा पर रवि चोपड़ा से असहमति
मुकेश खन्ना ने फिल्म उद्योग में व्याप्त पुरुषों से जुड़ी रूढ़ियों पर प्रहार करते हुए एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि दिवंगत फिल्म निर्माता रवि चोपड़ा ने एक बार उनसे कहा था, "मर्द वो होता है जिसके कई अफेयर हों।"
इस धारणा को सिरे से खारिज करते हुए खन्ना ने कहा:
"उस दौर में लगभग सभी के अफेयर थे, लेकिन मेरा नहीं। मेरा मानना है कि अपनी मर्दानगी साबित करने के लिए 10 गर्लफ्रेंड होना जरूरी नहीं है। इसे साबित करने के और भी कई शालीन तरीके हैं।"
शादी विरोधी नहीं, भाग्य के भरोसे हैं 'शक्तिमान'
अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि मुकेश खन्ना शादी की संस्था के खिलाफ हैं, लेकिन सच्चाई इसके उलट है। अभिनेता ने स्पष्ट किया कि वे विवाह की पवित्रता में आम लोगों से कहीं अधिक विश्वास रखते हैं। उनके अनुसार:
संस्था में विश्वास: "लोग सोचते हैं कि मैंने शादी नहीं की तो मैं इसमें यकीन नहीं रखता, जबकि सच यह है कि मैं विवाह को बहुत सम्मान देता हूँ।"
नियति का हाथ: "मेरा मानना है कि जीवनसाथी का मिलना भाग्य का खेल है। कोई भी व्यक्ति आपको यूं ही नहीं मिल जाता, वह किस्मत में लिखा होना चाहिए।"
उम्र महज एक आंकड़ा: जब उनसे पूछा गया कि क्या वे अब शादी करेंगे, तो उन्होंने बेबाकी से कहा, "अगर होना होता तो अब तक हो चुका होता। जिस स्त्री से मेरी शादी तय है, वह कहीं न कहीं होगी। जब भाग्य मिलाएगा, तब होगा। रही बात उम्र की, तो मैं उसे गिनता ही नहीं।"
महिलाओं के प्रति सम्मान और फिल्मी सफर
मुकेश खन्ना ने उन दावों को भी गलत बताया जिनमें उन्हें 'स्त्री विरोधी' पेश किया जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे महिलाओं का बेहद सम्मान करते हैं।
बता दें कि मुकेश खन्ना ने केवल टीवी ही नहीं, बल्कि बड़े पर्दे पर भी अपनी धाक जमाई है। उन्होंने 'सौगंध' (1991), 'सौदागर' (1991), 'मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी' (1994) और 'राजा' (1995) जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाई हैं। आज भी, अपनी बेबाक राय और सिद्धांतों के कारण वे सिने-जगत में एक विशिष्ट स्थान रखते हैं।





