रांची।तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) के 21 प्राथमिकी अभियुक्तों के खिलाफ सीआईडी को साक्ष्य नहीं मिले। पुलिस के साथ मुठभेड़ के केस में सीआईडी ने साक्ष्य नहीं मिलने पर केस में पलामू कोर्ट में अंतिम प्रतिवेदन साक्ष्य की कमी बताते हुए फाइल कर दी है। पूरा मामला पलामू के छतरपुर में 25 मई 2018 को हुए मुठभेड़ के केस से जुड़ा है।





क्या था मामला





25 मई 2018 को पलामू पुलिस को टीपीसी उग्रवादी संगठन की गतिविधियों के संबंध में गोपनीय सूचना मिली थी। पुलिस टीम सूचना के आधार पर छतरपुर के ग्राम डुंडरू के दक्षिणी हिसाग पहाड़ी के पास पहुंची थी। पुलिस और टीपीसी के उग्रवादियों के बीच मुठभेड़ हो गई। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने घटनास्थल से जख्मी हालात में उग्रवादी लल्लू सिंह, सोनू यादव और विकास पासवान को गिरफ्तार किया।मौके से तीन उग्रवादियों के शव बरामद किए गए।शवों की पहचान टीपीसी के उग्रवादी पवन गंझू उर्फ पवन शर्मा, चंदन जी उर्फ अमन, अमरजीत मांझी के तौर पर की गई थी।





किन-किन पर हुई चार्जशीट





घटना के बाद पुलिस ने एएसआई नगेंद्र कुमार के बयान पर एफआईआर दर्ज की थी।गिरफ्तार आरोपियों की स्वीकारोक्ति बयान पर पुलिस ने तीनों मृत आरोपियों के साथ-साथ 30 लोगों को नामजद और अज्ञात 10-15 लोगों को आरोपी बनाया। पुलिस ने इस मामले में पूरक चार्जशीट करते हुए पवन गंझू, चंदन जी उर्फ अमन, अमरजीत को मृत दिखाते हुए चार्जशीट दायर की, वहीं लल्लू सिंह, विकास पासवान, सोनी यादव, राजेश साव, गुड्डू यादव, अविनाश यादव उर्फ मनोज यादव के खिलाफ चार्जशीट दायर की। वहीं पुलिस को जांच में 21 टीपीसी उग्रवादियों के मुठभेड़ में शामिल होने को लेकर साक्ष्य नहीं मिले, जिसके बाद इनके खिलाफ चार्जशीट दायर नहीं हुई।