मुंबई: हिंदी सिनेमा के स्वर्ण युग को अपनी धुनों से सजाने वाले दिग्गज संगीतकार ओपी नैय्यर की यादें आज भी उनके प्रशंसकों के दिलों में ताजा हैं। हाल ही में उनकी पोती निहारिका रायजादा ने नानाजी के काम करने के तरीके, उनके अनुशासन और आशा भोंसले के साथ उनकी मशहूर जोड़ी पर दिल खोलकर बात की।
धुन बनाने का अनोखा अंदाज
निहारिका ने बताया कि ओपी नैय्यर के संगीत सृजन की प्रक्रिया बेहद जादुई थी।
राग और हारमोनियम: वह हारमोनियम पर धुन निकालते थे और फिर मोहम्मद रफी जैसे दिग्गज गायक उन धुनों को गुनगुनाते थे। इसके बाद साहिर लुधियानवी जैसे गीतकार उन धुनों पर शब्द पिरोते थे।
अद्वितीय राग: निहारिका के अनुसार, जो धुनें और राग उनके नानाजी ने ईजाद किए, वैसा प्रयोग बॉलीवुड के किसी अन्य संगीतकार ने आज तक नहीं किया।
आशा भोंसले बनाम लता मंगेशकर: सिद्धांतों की लड़ाई
ओपी नैय्यर अपने दौर के इकलौते ऐसे संगीतकार थे जिन्होंने कभी लता मंगेशकर के साथ काम नहीं किया। निहारिका ने इस पर रोशनी डालते हुए कहा:
टैलेंट को प्राथमिकता: उस दौर में जहाँ बड़े कलाकार केवल स्थापित गायकों के साथ काम करना चाहते थे, वहीं ओपी नैय्यर ने हमेशा नए टैलेंट को मौका दिया और उन्हें स्टार बनाया।
आशा ताई: उनकी 'म्यूज' (Muse): निहारिका का मानना है कि यदि लता जी संगीत की देवी थीं, तो आशा भोंसले उनके नानाजी के संगीत की प्रेरणा (म्यूज) थीं। उन्होंने ही आशा जी की गायकी को तराशा और दोनों ने मिलकर 'मेलोडी' का एक नया साम्राज्य खड़ा किया।
नानाजी से मिली सीख: अनुशासन और दया
निहारिका ने अपने नानाजी से दो मुख्य चीजें सीखीं:
समय की पाबंदी: जो काम जिस वक्त तय हुआ है, उसे उसी वक्त पूरा करना।
सहानुभूति: दूसरों के नजरिए से सोचना और जरूरतमंदों की मदद करना।
फिल्म 'मर्सी' (Mercy): एक भावनात्मक सफर
निहारिका इन दिनों अपनी फिल्म 'मर्सी' को लेकर भी चर्चा में हैं, जो 24 अप्रैल 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है।
निहारिका का अनुभव: फिल्म में अस्पताल के इमोशनल सीन्स को शूट करते समय निहारिका अपने निजी जीवन के दुखों (नाना-नानी को खोने का गम) से जुड़ गईं, जिससे उनके अभिनय में स्वाभाविकता आई।
सोनू निगम का कनेक्शन: फिल्म का एक गाना सोनू निगम ने गाया है, जो निहारिका को उनके नानाजी के गानों की याद दिलाता है। सोनू निगम और ओपी नैय्यर का रिश्ता पिता-पुत्र जैसा रहा है।
राज वासुदेवा और आदिल हुसैन: फिल्म के प्रोड्यूसर और एक्टर राज वासुदेवा ने बताया कि फिल्म की कहानी उनके परिवार की एक वास्तविक घटना से प्रेरित है। फिल्म में आदिल हुसैन जैसे मंझे हुए कलाकार की मौजूदगी ने इसे और भी प्रभावशाली बना दिया है।
निष्कर्ष: ओपी नैय्यर ने भारतीय सिनेमा को 'बाबूजी धीरे चलना' और 'मांग के साथ तुम्हारा' जैसे अनगिनत कालजयी गीत दिए। आज उनकी पोती निहारिका न केवल उनकी विरासत को आगे बढ़ा रही हैं, बल्कि 'मर्सी' जैसी फिल्मों के जरिए अपनी एक अलग पहचान बनाने की कोशिश में जुटी हैं।





