नई दिल्ली:
आज के डिजिटल दौर में सब्जी की खरीद से लेकर बड़े लेन-देन तक—हर जगह यूपीआई (UPI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। कुछ ही सेकंड में होने वाले इन भुगतानों ने हमारी जिंदगी जितनी आसान बनाई है, वहीं दूसरी ओर साइबर ठगी और यूपीआई फ्रॉड के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। ठग कभी फर्जी क्यूआर कोड तो कभी रिफंड के नाम पर लोगों को चूना लगा रहे हैं। इसी खतरे को देखते हुए प्रमुख डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म PhonePe ने अपने यूजर्स के लिए तीन बेहद जरूरी सावधानियां जारी की हैं।
आइए जानते हैं वे कौन सी 3 अहम बातें हैं, जिन्हें ध्यान में रखकर आप अपने बैंक खाते को सुरक्षित रख सकते हैं:
1. पैसे पाने (Receive) के लिए कभी न डालें UPI PIN
PhonePe के अनुसार, सबसे बड़ा भ्रम यही होता है कि लोग पैसे मंगाने के चक्कर में भी अपना यूपीआई पिन दर्ज कर देते हैं। आपको यह हमेशा याद रखना चाहिए कि यूपीआई पिन (UPI PIN) का इस्तेमाल केवल बैंक अकाउंट से पैसे भेजने या भुगतान करने के लिए होता है, पैसे रिसीव करने के लिए कभी पिन नहीं डालना पड़ता। यदि आप कोई सामान बेच रहे हैं और कोई खरीदार पैसे भेजने के नाम पर आपको पिन डालने को कहे, तो समझ लें कि वह ठगी की कोशिश कर रहा है।
2. पेमेंट करने से पहले रिसीवर का नाम जरूर जांचें
किसी को भी पैसे ट्रांसफर करने से पहले स्क्रीन पर दिख रहे रिसीवर के नाम (Account Holder Name) की पुष्टि जरूर करें। कई बार साइबर ठग मिलते-जुलते नाम या फर्जी यूपीआई आईडी का इस्तेमाल कर लोगों को धोखा देते हैं। यदि नाम उस व्यक्ति या दुकानदार से मैच न करे, जिसे आप वास्तव में पैसे भेजना चाहते हैं, तो तुरंत लेन-देन रोक दें।
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3. OTP, UPI PIN और बैंकिंग डिटेल किसी से शेयर न करें
बैंक अधिकारी या कस्टमर केयर बनकर फोन करने वाले ठग अक्सर केवीसी (KYC) अपडेट, रिफंड या अकाउंट बंद होने का डर दिखाकर ओटीपी और पिन मांगते हैं। PhonePe ने साफ किया है कि न तो बैंक और न ही कोई कंपनी कभी फोन पर गोपनीय जानकारी मांगती है। इसके अलावा अनजान लिंक पर क्लिक करने और स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करने से भी सख्त परहेज करें।
फ्रॉड होने पर कहाँ करें शिकायत?
यदि आपके साथ ऑनलाइन या यूपीआई धोखाधड़ी हो जाती है, तो घबराएं नहीं बल्कि तुरंत इन कदमों को उठाएं:
- साइबर हेल्पलाइन: तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करें।
- ऑनलाइन पोर्टल: आधिकारिक वेबसाइट cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करें।
- बैंक से संपर्क करें: तुरंत अपने बैंक को इसकी जानकारी देकर खाता ब्लॉक या फ्रीज करवाएं।
थोड़ी सी सतर्कता और समझदारी आपको बड़े वित्तीय नुकसान से बचा सकती है। डिजिटल लेन-देन करें, लेकिन पूरी सावधानी के साथ!
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