नई दिल्ली | विधि संवाददाता
दिवंगत उद्योगपति और करिश्मा कपूर के पूर्व पति संजय कपूर की संपत्ति को लेकर चल रहा पारिवारिक विवाद अब एक ऐसे मोड़ पर पहुँच गया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 'महाभारत' से भी बड़ा बताया है। संजय कपूर की मां रानी कपूर ने अपनी बहू (संजय की तीसरी पत्नी) प्रिया सचदेव के खिलाफ देश की शीर्ष अदालत में एक नई याचिका दायर की है, जिस पर कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है।
रानी कपूर की नई याचिका: 'ट्रस्ट में दखल बंद हो'
रानी कपूर ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है कि जब तक कोर्ट द्वारा शुरू की गई मध्यस्थता (Mediation) की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक प्रिया सचदेव और अन्य प्रतिवादियों को आरके फैमिली ट्रस्ट (RK Family Trust) के कामकाज से दूर रखा जाए।
बोर्ड मीटिंग पर रोक की मांग: याचिका में 18 मई 2026 को होने वाली 'रघुवंशी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड' की बोर्ड मीटिंग पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।
अतिरिक्त निदेशक: रानी कपूर के वकीलों का तर्क है कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बोर्ड में अपनी पसंद के अतिरिक्त निदेशकों की नियुक्ति करना है, जो संपत्ति के नियंत्रण को प्रभावित कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की 'महाभारत' वाली टिप्पणी
मंगलवार (12 मई 2026) को सुनवाई के दौरान जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस पारिवारिक कलह पर तल्ख टिप्पणी की।
"हम एक ऐसे क्षेत्र में प्रवेश कर चुके हैं जहाँ महाभारत भी बहुत छोटी लगेगी। यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है, हम इस पर विस्तार से गौर करेंगे।" — सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नई अर्जी पर गुरुवार (14 मई) को सुनवाई करने का फैसला किया है।
विवाद की जड़: करोड़ों की संपत्ति और ट्रस्ट पर कब्जा
संजय कपूर की मृत्यु के बाद उनकी विशाल संपत्ति, जिसमें रियल एस्टेट और निवेश कंपनियां शामिल हैं, उत्तराधिकार की लड़ाई का केंद्र बन गई हैं।
रघुवंशी इन्वेस्टमेंट: इस कंपनी के पास पारिवारिक संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा है, और इसके बोर्ड पर नियंत्रण का मतलब पूरी विरासत पर वर्चस्व है।
मध्यस्थता का प्रयास: सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 7 मई को दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने के लिए मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन नई याचिका बताती है कि दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट कम नहीं हुई है।
क्या है आगे का रास्ता?
संजय कपूर की तीसरी पत्नी प्रिया सचदेव और उनकी मां रानी कपूर के बीच की यह कानूनी लड़ाई अब पूरी तरह से 'कंट्रोल' और 'पावर' के इर्द-गिर्द सिमट गई है। 14 मई की सुनवाई यह तय करेगी कि क्या 18 मई की बोर्ड मीटिंग होगी या कोर्ट इस पर स्टे (Stay) लगाकर मध्यस्थता को प्राथमिकता देगा।
विश्लेषण: कॉर्पोरेट जगत के बड़े परिवारों में संपत्ति के विवाद अक्सर सार्वजनिक होते रहे हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा इसे 'महाभारत' की संज्ञा देना यह दर्शाता है कि यह लड़ाई केवल धन की नहीं, बल्कि गहरे पारिवारिक मतभेदों और कानूनी दांव-पेंचों की पराकाष्ठा है।





