चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर सिल्वर स्क्रीन का जादू सिर चढ़कर बोला है। 4 मई, 2026 को घोषित हुए विधानसभा चुनाव परिणामों में कॉलीवुड सुपरस्टार विजय (Thalapathy Vijay) की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) ने प्रचंड जीत दर्ज कर राज्य की राजनीति में नया अध्याय लिख दिया है। द्रविड़ राजनीति के गढ़ में एक नई पार्टी बनाकर इतनी बड़ी सफलता हासिल करना विजय के बढ़ते राजनीतिक कद को दर्शाता है।

तमिलनाडु: जहाँ पर्दे के हीरो बनते हैं 'मसीहा'

तमिलनाडु का इतिहास गवाह है कि यहाँ की जनता ने हमेशा अपने पसंदीदा फिल्मी सितारों को सिर-आंखों पर बिठाया है। विजय इस गौरवशाली सूची में शामिल होने वाले सबसे नए नाम हैं। आइए जानते हैं उन दिग्गजों के बारे में जिन्होंने विजय से पहले सिनेमा से सत्ता तक का सफर तय किया:

1. एमजी रामचंद्रन (MGR): गरीबों के असली मसीहा

एमजीआर तमिल सिनेमा के सबसे लोकप्रिय सितारे थे। 1972 में डीएमके से अलग होकर उन्होंने AIADMK बनाई। उनकी 'गरीब रक्षक' की छवि इतनी मजबूत थी कि वे लगातार तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे। आज भी तमिलनाडु की राजनीति में उनका नाम एक आदर्श के रूप में लिया जाता है।

2. जे. जयललिता: राजनीति की 'आयरन लेडी'

MGR की ऑन-स्क्रीन पार्टनर रहीं जयललिता ने उनके निधन के बाद AIADMK की कमान संभाली। तमाम विरोधों के बावजूद वे रिकॉर्ड 5 बार मुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने अम्मा कैंटीन जैसी योजनाओं से जनता के दिल में अपनी अमिट जगह बनाई।

3. विजयकांत: राजनीति के 'कैप्टन'

अपनी देशभक्ति फिल्मों के लिए मशहूर विजयकांत ने 2005 में DMDK बनाई। हालांकि वे कभी सीएम नहीं बन पाए, लेकिन कई वर्षों तक वे 'किंगमेकर' की भूमिका में रहे और राज्य के तीसरे सबसे बड़े राजनीतिक ध्रुव के रूप में उभरे।

सितारे जो राजनीति की पिच पर रहे 'फ्लॉप' या 'औसत'

राजनेता/अभिनेतापार्टी का नामपरिणाम / स्थिति
सरथकुमारAISMKकोई खास सफलता नहीं मिली; 2024 में भाजपा में विलय कर लिया।
कमल हासनमक्कल निधि मय्यम (MNM)2018 में पार्टी बनाई, लेकिन चुनावी मैदान में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई।

विजय की जीत के क्या हैं मायने?

विजय की जीत ने यह साबित कर दिया है कि तमिलनाडु की जनता अब करुणानिधि और जयललिता के बाद एक नए और युवा नेतृत्व की तलाश में थी। विजय ने न केवल अपनी फैन फॉलोइंग को वोटों में बदला, बल्कि भ्रष्टाचार और कल्याणकारी नीतियों पर ध्यान केंद्रित कर युवाओं का भरोसा जीता।

निष्कर्ष: विजय के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती एमजीआर और जयललिता जैसी 'गवर्नेंस' (प्रशासन) देने की है। क्या 'थलापति' पर्दे की तरह राजनीति के मैदान में भी लंबी पारी खेल पाएंगे? यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन फिलहाल तमिलनाडु की सड़कों पर 'TVK' के नारों की गूँज है।