चेन्नई: आज तमिलनाडु की राजनीति और सिनेमा के शिखर पर बैठे थलपति विजय (Thalapathy Vijay) का नाम ही सफलता की गारंटी माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 34 साल के शानदार करियर वाले इस सुपरस्टार की शुरुआत बेहद मायूस करने वाली थी? जिस अभिनेता की एक झलक पाने के लिए आज हजारों की भीड़ उमड़ती है, उनकी पहली फिल्म को दर्शकों ने सिरे से नकार दिया था।
डेब्यू फिल्म: 'नालैया थीरपू' और असफलता का स्वाद
थलपति विजय ने साल 1992 में फिल्म 'नालैया थीरपू' (Naalaiya Theerpu) से लीड एक्टर के तौर पर डेब्यू किया था।
पारिवारिक प्रोजेक्ट: इस फिल्म का निर्देशन उनके पिता एस ए चंद्रशेखर ने किया था और इसकी निर्माता उनकी माँ शोभा चंद्रशेखर थीं।
उम्र: जब विजय ने यह फिल्म की, तब उनकी उम्र महज 18 साल थी।
बॉक्स ऑफिस का हाल: फिल्म दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में नाकाम रही और अपना बजट तक नहीं वसूल पाई।
कड़ी आलोचना और ट्रोलिंग का सामना
डेब्यू के वक्त विजय को केवल असफलता ही नहीं, बल्कि तीखी आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा।
लुक्स पर निशाना: उस दौर में उनके लुक और स्क्रीन प्रेजेंस को लेकर काफी आलोचना हुई थी।
अभिनय: आलोचकों ने उनकी एक्टिंग को भी औसत दर्जे का बताया था।
डिजिटल रिस्पॉन्स: दिलचस्प बात यह है कि यह फिल्म आज यूट्यूब पर मुफ्त उपलब्ध है, लेकिन वहां भी इसे अब तक केवल एक लाख के करीब व्यूज ही मिल पाए हैं, जो विजय की वर्तमान लोकप्रियता के मुकाबले बेहद कम हैं।
चाइल्ड आर्टिस्ट से सुपरस्टार तक का सफर
विजय के करियर की टाइमलाइन संघर्ष और फिर कभी न थमने वाली सफलता की कहानी कहती है:
1984: फिल्म ‘वेत्री’ से बतौर चाइल्ड एक्टर शुरुआत की।
1992: लीड रोल में डेब्यू (फ्लॉप)।
1993: फिल्म ‘सेंथूरपांडी’ की रिलीज, जिसे दर्शकों का सकारात्मक रिस्पॉन्स मिला और यहीं से विजय के स्टारडम की नींव पड़ी।
सीख: 'नालैया थीरपू' की विफलता ने विजय को तोड़ा नहीं, बल्कि और मजबूत बनाया। आज 69 फिल्मों के सफर के बाद वे न केवल एक अभिनेता हैं, बल्कि तमिलनाडु के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री के रूप में एक 'जननायक' बनकर उभरे हैं।





