लखनऊ।उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणाम ने हर किसी को हैरान कर दिया है।जहां एक तरफ बड़े-बड़े राजनेता पराजित हुए तो वहीं उत्तर प्रदेश में बाहुबली के नाम से लोकप्रिय नेताओं ने जीत दर्ज कर सियासत में अपना दमखम दिखाया है।उत्तर प्रदेश के बाहुबलियों ने जीत दर्ज कर एक बार फिर माननीय कहलाने का मौका खुद को दिया है।

प्रतापगढ़ जिले की कुंडा विधानसभा से सात बार के विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया ने अपनी पारंपरिक कुंडा सीट को बरकरार रखा और समाजवादी पार्टी के गुलशन यादव को 30,418 वोटों के अंतर से पराजित किया। राजा भइया जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ रहे थे। राजा भइया ने अपनी पार्टी का गठन नवंबर 2018 में किया था।गुलशन यादव के खिलाफ 21 आपराधिक मामले दर्ज हैं। राजा भइया के चुनावी हलफनामे में कुल 40 में से एक मामला लंबित है। पांचवें चरण में मतदान के कुछ घंटे बाद 27 फरवरी को राजा भइया और गुलशन यादव के समर्थकों के बीच झड़प हो गई थी। राजा भइया पर सपा के एक दलित बूथ एजेंट के साथ मारपीट करने का मामला दर्ज किया गया था।गुलशन यादव पर एक अन्य मामले में अपनी पार्टी का समर्थन नहीं करने के लिए एक किसान पर कथित रूप से हमला करने का मामला दर्ज किया गया था।

बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी के बड़े बेटे अब्बास अंसारी ने भारतीय जनता पार्टी के अशोक कुमार सिंह के खिलाफ 37,674 मतों के अंतर से आराम से मऊ सदर सीट जीत ली।अब्बास ने सपा गठबंधन सहयोगी सुभासपा के उम्मीदवार के रूप में अपना पहला चुनाव लड़ा।मुख्तार अपने गढ़ माने जाने वाले मऊ सदर से 2017 तक लगातार पांच बार विधायक बने थे।अब्बास पर मतदान के बाद सरकारी अधिकारियों को कथित रूप से धमकाने का मामला दर्ज किया गया था। चुनाव आयोग ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए 24 घंटे के लिए किसी भी सार्वजनिक सभा,जुलूस,रैली और किसी भी साक्षात्कार में शामिल होने पर रोक लगा दी थी।

अभय सिंह गैंगस्टर से नेता बनें अयोध्या की गोशाईगंज सीट पर भारतीय जनता पार्टी की आरती तिवारी को 12,774 वोटों से हराने में कामयाब रहे।पुलिस के मुताबिक सपा विधायक अभय सिंह पर कुल 35 आपराधिक मामले दर्ज हैं।आरती तिवारी के पूर्व विधायक पति इंद्र प्रताप उर्फ खब्बू तिवारी जालसाजी के एक मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद जेल में हैं। मतदान से कुछ दिन पहले दोनों दलों के समर्थकों ने एक-दूसरे पर हमला किया,जिसके परिणामस्वरूप अभय सिंह के खिलाफ 19 फरवरी को प्राथमिकी दर्ज की गई थी और गिरफ्तार किया गया था लेकिन उसी दिन जमानत पर रिहा कर दिया गया था।

गैंगस्टर से नेता बने बृजेश सिंह के भतीजे भारतीय जनता पार्टी के विधायक सुशील सिंह के चुनावी हलफनामे में केवल एक लंबित मामला दिखाता है।सुशील सिंह को समाजवादी पार्टी के मनोज कुमार के खिलाफ चंदौली जिले की सैयदराजा से विजेता घोषित किया गया।अंतर 11226 वोट का अंतर था।बृजेश सिंह वाराणसी जेल में बंद है।मनोज कुमार की पत्नी नीलू सिंह उर्फ नीलम ने भी निर्दलीय टिकट के रूप में इस सीट से चुनाव लड़ा और केवल 427 वोट मिले।

पूर्व सांसद रमाकांत यादव ने अपने खिलाफ 30 मामले घोषित किए थे।रमाकांत यादव ने आजमगढ़ जिले की फूलपुर पवई सीट से सपा के टिकट पर 24,747 मतों से जीत हासिल की।रमाकांत यादव ने भारतीय जनता पार्टी के राम सूरत को पराजित किया।राम सूरत को 55,647 वोट मिले।

जौनपुर के पूर्व सांसद जदयू उम्मीदवार धनंजय सिंह मल्हानी सीट समाजवादी पार्टी के लकी यादव से हार गए।लकी यादव पूर्व मंत्री पारस नाथ यादव के बेटे हैं।पारस नाथ यादव का लंबी बीमारी के बाद 2020 में निधन हो गया था। 7 मार्च को अंतिम चरण के मतदान के बाद दोनों उम्मीदवारों के समर्थकों ने एक दूसरे पर पथराव किया।

भदोही की ज्ञानपुर सीट से लगातार चार बार जीत हासिल दर्ज करने के बाद जेल में बंद विजय मिश्रा निषाद पार्टी के विपुल दुबे के खिलाफ अपने निर्वाचन क्षेत्र को बरकरार नहीं रख सके। प्रगतिशील मानव समाज पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ते हुए विजय मिश्रा 34,782 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। विजय मिश्रा पर बलात्कार और जमीन कब्जा करने सहित कई आरोप हैं। विजय मिश्रा के चुनावी हलफनामे के अनुसार 20 आपराधिक मामले लंबित हैं।

यश भद्र सिंह उर्फ मोनू 53,994 मतों के साथ सुल्तानपुर में इसौली सीट की प्रतियोगिता के लिए तीसरे स्थान पर खिसक गए। बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे मोनू सिंह को 53,994 वोट मिले,जबकि समाजवादी पार्टी के मोहम्मद ताहिर खान ने 69,294 वोटों के साथ सीट जीत दर्ज की। मोनू सिंह के खिलाफ 21 मामले लंबित हैं।

एक करीबी मुकाबले में रालोद उम्मीदवार गाजियाबाद की लोनी सीट से भारतीय जनता पार्टी के नंद किशोर से 8,710 वोटों से हार गए। मदन भैया ने अपने हलफनामे में दो आपराधिक मामलों की घोषणा की थी।

महराजगंज के नौतनवा में बहुजन समाज पार्टी प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहें। 90,122 वोटों के साथ निषाद पार्टी के ऋषि ने जीत दर्ज की।अमन मणि अपनी पत्नी सारा सिंह की 2005 की हत्या के मामले में जमानत पर बाहर हैं। उनके पिता अमर मणि और मां मधुमणि एक हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं और जेल में बंद हैं। अमर मणि पूर्व मंत्री हैं।