बिश्केक/नई दिल्ली। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन में भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं को बड़ी सफलता मिली है। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में जारी किए गए साझा घोषणा पत्र में सभी सदस्य देशों ने आतंकवाद, चरमपंथ और अलगाववाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने का संकल्प दोहराया है। खास बात यह रही कि चीन सहित सभी देशों ने इस घोषणा पत्र पर सहमति जताई, जिससे सीमा पार आतंकवाद को अपनी आधिकारिक नीति बनाने वाले पाकिस्तान पर भारी कूटनीतिक दबाव बन गया है।

विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, घोषणा पत्र में स्पष्ट किया गया है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह के दोहरे रवैये (Double Standards) को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

'आतंकवाद को हथियार बनाने वालों को मिले साफ संदेश': पीएम मोदी

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद पर बिना लाग-लपेट के कड़ा संदेश दिया:

"आतंकवाद के वित्तपोषण (Funding), भर्ती, उग्रवाद और उनके सुरक्षित ठिकानों के पूरे तंत्र को नष्ट करना होगा। जो देश आतंकवाद को राज्य की नीति के उपकरण (State Policy Instrument) के रूप में इस्तेमाल करते हैं, उन्हें स्पष्ट संदेश देना होगा कि आतंकवाद किसी की सामरिक संपत्ति (Strategic Asset) नहीं हो सकता।"

बिश्केक घोषणा पत्र के 3 प्रमुख सुरक्षा बिंदु

  • क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म पर प्रहार: सीमा पार से होने वाली आतंकियों की आवाजाही और उनके सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया गया।
  • स्वार्थी उपयोग पर रोक: किसी भी देश द्वारा अपने राजनीतिक या स्वार्थी उद्देश्यों के लिए आतंकी व अलगाववादी समूहों का इस्तेमाल पूरी तरह अस्वीकार्य माना गया।
  • यूनिवर्सल सेंटर की नियमावली: सुरक्षा चुनौतियों और संगठित अपराधों से निपटने के लिए एक एकीकृत 'यूनिवर्सल सेंटर' की नियमावली को अंतिम रूप दिया गया।

2025 से 2026: भारत का मजबूत कूटनीतिक बदलाव

यह घोषणा पत्र भारत की पुरानी और दृढ़ नीति की बहुत बड़ी जीत है। गौरतलब है कि 2025 में अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले के बाद किंगदाओ में आयोजित SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक में पाकिस्तान और चीन ने घोषणा पत्र से आतंकवाद का उल्लेख हटाने की कोशिश की थी, जिस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया था।

तत्पश्चात तियानजिन सम्मेलन और अब 2026 के बिश्केक शिखर सम्मेलन तक आते-आते भारत ने पूरे संगठन को आतंकवाद की स्पष्ट परिभाषा और कड़ी निंदा पर एकमत कर दिया है।

आगामी SCO की अध्यक्षता पाकिस्तान के पास जाने वाली है, लेकिन चीन द्वारा इस सख्त घोषणा पत्र पर दस्तखत करने के बाद अब इस्लामाबाद के लिए आतंकवाद के मुद्दे पर ढाल बनाना असंभव हो गया है।