वाराणसी।काशी के ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग मिलने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद वहां पूजा करने के लिए अड़ गए हैं।शनिवार को ज्ञानवापी जाने से पहले अविमुक्तेश्वरानंद के मठ को पुलिस ने चारों तरफ से घेराबंदी कर नजरबंद कर दिया।इसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि पूजा उनका अधिकार है और जबतक वे ज्ञानवापी में पूजा नहीं कर लेते तब तक भोजन ग्रहण नहीं करेंगे।इसके बाद वे मठ के दरवाजे पर ही अनशन पर बैठ गए।
आपको बता दें कि ज्ञानवापी से पहले हाल ही में अविमुक्तेश्वरानंद सुर्खियों में थे।हाल ही में मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में श्रीराम मंदिर में दर्शन करने के लिए अविमुक्तेश्वरानंद पहुंचे थे।मंदिर की दीवार पर साईं बाबा की मूर्ति देखकर वे भड़क गए थे।उन्होंने कहा था कि श्रीराम के मंदिर में साईं का क्या काम।आपको साईं की पूजा करनी है तो फिर राम और कृष्ण की क्या जरूरत है।इस दौरान दर्शन के लिए बुलाने वाले एक शिष्य को उन्होंने फटकार भी लगाई थी और कहा था कि क्या अब हम साईं के दर्शन करेंगे।जबतक मंदिर से साईं की प्रतिमा नहीं हटाई जाएगी, मैं मंदिर में प्रवेश नहीं करूंगा. इसके बाद साईं की प्रतिमा को हटा दिया गया था।
जानें कौन हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के बड़के जिले प्रतापगढ़ में जन्म लेने वाले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य हैं।अविमुक्तेश्वरानंद का नाम उमाशंकर है।प्रतापगढ़ में प्राथमिक शिक्षा के बाद वे गुजरात चले गए थे और गुजरात में संस्कृत की शिक्षा ली थी।पढ़ाई के बाद अविमुक्तेश्वरा नंद को शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य का सान्निध्य और आशीर्वाद प्राप्त हुआ।जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी में मंदिर तोड़े जाने का विरोध किया था।इसके अलावा उन्होंने छत्तीसगढ़ के कवर्धा में सनातन धर्म के ध्वज को हटाने के विरोध में हजारों लोगों के साथ रैली निकालकर ध्वज को स्थापित भी किया था।





