आखिर अजय मिश्रा टेनी पर कार्रवाई करने से क्यों हिचक रहे हाईकमान, नफा-नुकसान के आकलन में जुटी भाजपा
आखिर अजय मिश्रा टेनी पर कार्रवाई करने से क्यों हिचक रहे हाईकमान,नफा-नुकसान के आकलन में जुटी भाजपा <Br/> <Br/>
sanjay kumar📍 लखनऊ, उत्तर प्रदेश

लखनऊ।लखीमपुर हिंसा के बाद एसआईटी की जांच रिपोर्ट आने के साथ ही केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के इस्तीफे की मांग को लेकर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सियासी बवाल शुरू हो गया है।भाजपा हाईकमान टेनी के इस्तीफे पर चुप्पी साधे हुए है।गृह राज्य मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर लोकसभा और राज्यसभा में गतिरोध बना हुआ है।सियासी गलियारों में चर्चा है कि इतनी फजीहत के बाद भी हाई कमान टेनी पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है।
भाजपा के जिला महासचिव से राजनीतिक करियर की शुरूआत करने वाले गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी की पहचान एक ब्राह्मण नेता के रूप में है। टेनी लखीमपुर खीरी से दो बार सांसद का चुनाव जीत चुके हैं।पहली बार 2012 में निघासन सीट से विधायक बने थ। इलाके में अजय मिश्रा टेनी को लोग टेनी महाराज कहते हैं।
लखीमपुर खीरी हिंसा में शुरूआती जांच में अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा के नाम आने के बाद भी भाजपा हाईकमान टेनी को हटाने से क्यों हिचकिचा रहे है।भाजपा हाईकमान के चुप्पी पर भी विपक्ष सवाल उठा रहा है।अजय मिश्रा टेनी को हटाने को लेकर भाजपा आलाकमान नफा-नुकसान का आकलन कर रहे है। बताया जा रहा है कि हाई कमान को चुनावी साल में टेनी की बर्खास्तगी से तराई इलाकों में सीट खिसकने का डर सता रहा है।इतना ही नहीं चुनाव से पहले ब्राह्मण वोट बैंक पर भी असर हो सकता है।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि जिस इलाके से अजय मिश्र टेनी आते हैं वो नेपाल से सटा इलाका माना जाता है।इसे यूपी में तराई बेल्ट कहा जाता है।तराई के अन्तर्गत पीलीभीत,लखीमपुर खीरी, सीतापुर और शाहजहांपुर जिले आते है।इन जिलों में विधानसभा की करीब 42 सीटें हैं, जिसमें भाजपा को पिछले चुनाव में 37 सीटों पर जीत मिली थी।
इतना ही नहीं तराई बेल्ट में ब्राह्मणों की आबादी सबसे ज्यादा ह।बताया जाता है कि यहां पर आजादी के बाद पलायन हुआ तो सिख भी आकर बस गए। जिसके बाद से इस इलाके में सिख वर्सेज ब्राह्मण की राजनीति चलती है।ऐसे में भाजपा आलाकमान को डर है कि अगर अजय मिश्रा टेनी पर कार्रवाई की गई तो ब्राह्मण नाराज हो सकते हैं।
अजय मिश्रा टेनी से पहले भी कई ऐसे मामले सामने आए, जब भाजपा हाईकमान ने एक्शन लेने में देरी की। पिछले साल ही विधायक कुलदीप सिंह सेंगर मामले में भी भाजपा की काफी किरकिरी हुई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान के बाद पार्टी एक्शन में आई और सेंगर को पार्टी से निलंबित कर दिया।
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