वारसॉ (पोलैंड): पूर्वी यूरोपीय देश पोलैंड में मध्यमार्गी सरकार और राष्ट्रवादी दक्षिणपंथी गुट के बीच न्यायिक वर्चस्व की लड़ाई खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। शुक्रवार को देश के संवैधानिक न्यायाधिकरण (Constitutional Tribunal) के मुख्य न्यायाधीश बोगदान श्विएचकोव्स्की (Bogdan Święczkowski) को निलंबित किए जाने के बाद से राजधानी वारसॉ में भारी राजनीतिक और सामाजिक तनाव उत्पन्न हो गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए अदालत परिसर के बाहर दंगा-रोधी पुलिस को तैनात किया गया है।
राष्ट्रपति ने बीच में छोड़ी अफ्रीका यात्रा
देश में गहराते संवैधानिक संकट और 'तख्तापलट' जैसी आशंकाओं के बीच पोलैंड के राष्ट्रपति कैरोल नवरोकी (Karol Nawrocki) ने अपनी आधिकारिक अफ्रीका यात्रा को तुरंत रद्द कर दिया है और आपात स्थिति में वारसॉ लौटने का फैसला किया है।
न्यायाधिकरण का दावा: "यह तख्तापलट है"
संवैधानिक न्यायाधिकरण की जज अन्ना कोरविन-पियोट्रोव्स्का ने मुख्य न्यायाधीश के निलंबन की घोषणा की। न्याय मंत्री और अटॉर्नी जनरल वाल्डेमार ज़ुरेक के अनुसार, उन्होंने श्विएचकोव्स्की और उनके डिप्टी बार्टलोमी सोचांस्की की कानूनी छूट (Immunity) को हटाने की मांग की थी।
वहीं, दूसरी ओर:
- कोर्ट का रुख: संवैधानिक न्यायाधिकरण के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से जारी बयान में इस कार्रवाई को सीधे तौर पर 'तख्तापलट' (Coup) करार दिया गया और स्पष्ट किया गया कि श्विएचकोव्स्की अभी भी कानूनन अपने पद पर बने हुए हैं।
- विपक्ष का विरोध: मुख्य विपक्षी दल 'लॉ एंड जस्टिस' (PiS) के समर्थक और कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर मुख्य न्यायाधीश के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे कोर्ट के बाहर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा है।
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विवाद की मुख्य वजह: न्यायिक सुधार और PiS का कार्यकाल
यह निलंबन पोलैंड की न्याय प्रणाली के कामकाज और उसकी स्वायत्तता को लेकर चल रहे लंबे विवाद का नतीजा है:
- टस्क सरकार का अभियान: वर्ष 2023 में सत्ता में आए मध्यमार्गी प्रधानमंत्री डोनल्ड टस्क (Donald Tusk) ने यूरोपीय संघ (EU) के साथ संबंध सुधारने और 'कानून के शासन' (Rule of Law) को बहाल करने का वादा किया था। सरकार 2015 से 2023 के दौरान पिछली PiS सरकार द्वारा नियुक्त किए गए जजों को पद से हटाने का प्रयास कर रही है।
- यूरोपीय संघ की चिंताएं: PiS के शासनकाल के दौरान यूरोपीय संघ ने बार-बार चेतावनी दी थी कि पोलैंड का संवैधानिक न्यायाधिकरण निष्पक्ष न रहकर सरकार के इशारों पर काम कर रहा है। अदालत ने कई बार यूरोपीय संघ के कानूनों के बजाय राष्ट्रीय कानूनों को तरजीह देने के आदेश दिए थे।
- संस्थागत गतिरोध: राष्ट्रपति नवरोकी ने संवैधानिक न्यायाधिकरण के लिए टस्क सरकार द्वारा प्रस्तावित नए नामों को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है, जिससे न्यायपालिका में गतिरोध और गहरा गया है।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता और राजनीतिक हस्तक्षेप के बीच जारी यह सीधी जंग न केवल पोलैंड के लोकतंत्र, बल्कि पूरे यूरोपीय संघ के राजनीतिक संतुलन पर गहरा असर डाल सकती है।
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