पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि,हंटरगंज,चतरा।देश की आजादी मिलने के 76 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन चतरा जिले के हंटरगंज प्रखण्ड क्षेत्र के डाहा पंचायत के बिहिया गांव तरीपर टोला में रह रहे सैकड़ों लोगों का जीवन आज भी 1947 के ईदगिर्द घूम रहा है। इसे सरकारी तंत्र की नाकामी कहें या फिर कुछ और।देश को आजाद हुए 76 साल गुजर चुके और झारखंड राज्य का निर्माण हुए 24 साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक इन गांव में बिजली का न पहुंचना सरकार के विकास के लंबे-लंबे दावों की पोल खोलता है। एक लंबा अरसा बीतने के बावजूद प्रखण्ड के कई सुदुरवर्ती गांवों में बिजली नहीं पहुंची हैं। लोग अभी भी अंधेरे युग में जीवन यापन कर रहे हैं। ग्रामीण बिजली को लेकर वोट बहिष्कार करने का मन बना लिया है।।सभी ग्रामीण आक्रोशित होकर बस एक ही नारा लगा रहे हैं बिजली नहीं तो वोट नहीं।





ग्रामीणों ने सुनाए हाल





ग्रामीण तारा देवी बताती है कि मेरी उमर 60 साल की हो चुकी है,लेकिन अभी तक बिजली नहीं पहुंची है।तारा देवी आगे बताती हैं कि चाहे गेंहू पिसवाना हो,या बच्चों का स्कूल हो, खेती किसानी की जरूरतें हो या मोबाइल को चार्ज करने जैसी जरूरत।सब बिहिया गांव जाकर ही संभव हो पाता है।





ग्रामीण हरमू यादव का कहना है कि पिछले 75 सालों से अभी तक इस गांव में बिजली नहीं पहुंची है। हमारे छोटे - छोटे बच्चे ढिबरी युग में जी रहे हैं।अब हम सभी को अपनी आने वाली पीढ़ियों की फिक्र सताने लगी है।





ग्रामीण राजेश शर्मा के अनुसार बिजली नहीं होने से पेयजल और सिंचाई की सुविधाएं भी यहां नहीं है।इन समस्याओं का खामियाजा गांव के नौजवानों को भुगतना पड़ रहा है,क्योंकि गांव की दुर्दशा देखकर कोई भी लड़की यहां बहू बनकर आने को तैयार नहीं है।यहां के छात्रों को भी पढ़ाई करने में दिक्कत हो रही है।मोदी जी का नारा डिजिटल इंडिया आख़िर डिजिटल इंडिया कैसे बनेगा।जब गांव में बिजली ही नहीं है हम समस्त ग्रामीण यदि 10 दिनों में बिजली नहीं आएगी तो वोट बहिष्कार करने को बाध्य हैं।ग्रामीण बस एक ही नारा लगा रहे थे।बिजली नहीं तो वोट नहीं,विधानसभा चुनाव का मतदान बहिष्कार करते हैं।





क्या कहते है बिजली विभाग पदाधिकारी





जब पत्रकार ने दूरभाष के माध्यम से चतरा जिला बिजली विभाग पदाधिकारी पंचानन सिंह से संपर्क हुआ तो उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही इस गांव बिजली की समस्या निदान की जाएगी। वहीं सभी जगह बिजली पहुंच चुकी हैं। कुछ टोला में नहीं पहुंची हैं उसका सर्वे किया जा रहा है। वोट बहिष्कार करना सोल्यूशन नहीं है, लेकिन आज 21वीं सदी में अगर गांव ढिवरी युग जी रहा है तो यह विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल खोल रहा है।