राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित ‘हरा भारत स्वराज: राजीव गांधी के दृष्टिकोण को श्रद्धांजलि’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने कहा कि संघ देश के 150 करोड़ लोगों पर ‘सत्य का अपना संस्करण’ थोपने की कोशिश कर रहा है, जो कि भारतीय दर्शन और स्वराज की मूल भावना के खिलाफ है।

आरएसएस से अपनी वैचारिक असहमति का कारण बताते हुए राहुल गांधी ने कहा:

"आरएसएस के साथ मेरी मुख्य समस्या यह है कि उसने तय कर लिया है कि वह 1.5 अरब लोगों का सच जानता है। लेकिन मेरा मानना है कि केवल वे 150 करोड़ लोग ही अपनी सच्चाई जान सकते हैं। अगर मैं यह मानने लगूं कि मैं आपका सच जानता हूं, तो मैं गलत हूं क्योंकि मैंने वे परिस्थितियां, दुख और अनुभव नहीं देखे हैं जो आपने झेले हैं। जब मेरे पिता, मां, दोस्त और अनुभव आपके जैसे नहीं हैं, तो मैं आपकी सच्चाई जानने का दावा कैसे कर सकता हूं?"

"केवल 150 करोड़ लोग ही जान सकते हैं अपनी सच्चाई"

कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने व्यक्तिगत अनुभव और महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए निम्नलिखित मुख्य बातें रखीं:

  • हर व्यक्ति की यात्रा अद्वितीय: महात्मा गांधी के सिद्धांतों का हवाला देते हुए राहुल ने कहा कि हर जीवित प्राणी एक अद्वितीय इकाई है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का पथ, उसकी परिस्थितियां और सत्य की खोज अलग होती है।
  • आरएसएस की सोच पर सवाल: राहुल ने कहा, "आरएसएस के साथ मेरी मुख्य समस्या यही है कि उन्होंने यह तय कर लिया है कि वे 1.5 अरब लोगों का सच जानते हैं। मैं कहता हूं कि केवल वे 150 करोड़ लोग ही अपना सच जान सकते हैं। अगर मैं यह मानने लगूं कि मैं आपका सच जानता हूं, तो यह गलत होगा क्योंकि मैंने वे परिस्थितियां नहीं झेलीं जो आपने झेली हैं।"
  • छात्रों पर हमलों का जिक्र: राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि एक समूह ने पूरी व्यवस्था (System) पर नियंत्रण कर लिया है और वे देश के हर नागरिक की सच्चाई तय करने का दावा कर रहे हैं। इसी सोच के कारण रोजाना छात्रों और अन्य वर्गों पर हमले किए जा रहे हैं।

'स्वराज' की वास्तविक परिभाषा और जिम्मेदारी

राहुल गांधी ने 'स्वराज' शब्द के गूढ़ अर्थ को समझाते हुए कहा:

  • स्व पर राज: स्वराज का अर्थ केवल राजनीतिक स्वतंत्रता या आजादी नहीं है, बल्कि 'स्व पर राज' (खुद पर शासन) करना है।
  • गांधीजी का उदाहरण: उन्होंने कहा कि यदि 70-80 साल पहले जेल में बंद महात्मा गांधी से पूछा जाता कि क्या वे आजाद हैं, तो उनका जवाब होता कि वे भले ही जेल में हैं, लेकिन वे 'स्व पर राज' करते हैं।
  • नैतिक जिम्मेदारी: 'स्वराज' एक विशुद्ध हिंदुस्तानी शब्द है जिसमें गहरी व्यक्तिगत और सामाजिक जिम्मेदारी छिपी होती है। गांधी जी चाहते थे कि देश का हर नागरिक इसी स्वराज के रास्ते पर चले।

मुख्य बिंदु:

  • व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर जोर: देश के हर नागरिक को अपनी पसंद के अनुसार करियर (इंजीनियर, रसोइया, मोची या अंतरिक्ष यात्री) और जीवन पथ चुनने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
  • सत्य का अधिकार: महात्मा गांधी की पुस्तक का नाम 'माई एक्सपेरिमेंट्स विद ट्रुथ' (सत्य के साथ मेरे प्रयोग) था, जिसका अर्थ है कि सत्य की खोज व्यक्तिगत होती है।
  • समावेशी भारत की आवश्यकता: धर्म, जाति, लिंग या उम्र से परे जाकर हर नागरिक को यह महसूस होना चाहिए कि यह देश उनका है और उनकी आवाज व सच्चाई का सम्मान किया जाता है।