10 वर्षीय मासूम को लेकर बस से गया सबर परिवार अपने घर





जमशेदपुर।कोल्हान का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल एमजीएम जिसे सुधारने की कवायद चल रही है। मगर इसकी व्यवस्था को सुधार पाना इतना आसान नहीं साहब।अस्पताल की व्यवस्था की सुधार में यहां के कर्मचारी ही बाधक बन रहे हैं। ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है। बीते 4 दिसंबर को पटमदा बारूबेड़ा निवासी 10 वर्षीय पवन सबर खेलने के दौरान चोटिल हो गया था। जिसके बाद परिजन उसे इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। जहां से डॉक्टरों ने परिजनों को उसके हाथ टूटने की जानकारी देते हुए एमजीएम अस्पताल रेफर कर दिया। उसी दिन परिजन उसे लेकर अस्पताल पहुंचे और जिसके बाद उसका इलाज अस्पताल के ऑर्थो वार्ड में हुआ।बीते बुधवार की संध्या ही पवन को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। मगर शाम होने की वजह से वह घर नहीं जा सका।





परिजन गुरुवार की सुबह घर जाने के लिए अस्पताल के एंबुलेंस यूनिट के प्रभारी गौरी महाली से मिले। जिसपर प्रभारी ने मरीज के परिजनों को डिस्चार्ज पेपर दिखाने को कहा। वहीं पवन के पिता सुखदेव सबर और चाचा तपन सबर डिस्चार्ज पेपर लेकर 12 बजे एंबुलेंस यूनिट पहुंचे तो प्रभारी गौरी महाली ने उन्हें कहा कि सरकारी एंबुलेंस में तेल नहीं है और भरने के लिए डेढ़ से दो घंटे का समय लगेगा। वे इंतजार कर सकते हैं तो करें नहीं तो बस से गांव चले जाएं। जिसके बाद मासूम और उसके परिजन मायूस होकर एंबुलेंस यूनिट से निकल गए। जबकि दूसरी ओर प्रभारी गौरी महाली सबर को ना पहुंचाकर अपने प्राइवेट सूमो एंबुलेंस संख्या जेएच 05 बीजे - 0607 से अस्पताल का पर्सनल भाड़ा मारने के लिए ड्यूटी के दौरान ही हॉट गम्हरिया निकल गए। किसी तरह यह मामला अस्पताल उपाधीक्षक डॉ नकुल प्रसाद चौधरी के पास पहुंचा तो उन्होंने प्रभारी गौरी महाली को 10 मिनट के अंदर ऑफिस में हाजिर होने की बात कही। मगर घंटो बीतने के बाद भी वह नहीं आया। जिसके बाद सबर को घर पहुंचाने के लिए 2 बजे ड्यूटी में आने वाले एंबुलेंस चालक रमेश महाली को कहा गया। मगर जब तक वह आया तब तक सबर परिवार बस से अपने गांव की तरफ निकल चुका था।





राज्य सरकार की तरफ से सबर परिवारों को बहुत सारी सुविधाएं दी गई है। जिसमें घर से अस्पताल लाने और फिर घर पहुंचाने के लिए निःशुल्क एंबुलेंस सेवा भी शामिल है। मगर यह वाक्या कुछ और ही बयां कर रहा है। सिर्फ यही नहीं प्रभारी गौरी महाली ने एमजीएम अस्पताल की दीवारों पर एंबुलेंस का सरकारी रेट चार्ट भी चिपका रखा है। जिसमें एमजीएम से रांची रिम्स जाने का किराया 2100 रुपए है। जबकि एमजीएम से रांची के रिम्स रेफर होने वाले मरीजों को 108 एंबुलेंस निःशुल्क लेकर जाती है। बावजूद इसके रेट चार्ट में अपनी कमाई के लिए प्रभारी ने अपने मोबाइल नंबर के साथ साथ किराया भी लिख दिया है। गौरी महाली एमजीएम अस्पताल में स्थाई कर्मचारी भी हैं। और तो और कई प्राइवेट एंबुलेंस अस्पताल परिसर प्रशासनिक भवन के पीछे सरकारी एंबुलेंस के बीच खड़ी रहती है। जिसे रोकने वाला कोई नहीं है। इस पूरे मामले में अस्पताल उपाधीक्षक डॉ नकुल प्रसाद चौधरी ने कहा कि एंबुलेंस प्रभारी को शो कोज किया गया है। जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।