खूंटी।भगवान बिरसा मुंडा की 15 नवंबर को जयंती है। झारखंड के खूंटी जिले के उलिहातू में धरती आबा का जन्म हुआ था।हर साल उलिहातू में बड़े-बड़े नेता और मंत्री भगवान बिरसा की जयंती पर उनको नमन करने पहुंचते रहे हैं। झारखंड अलग राज्य बनने के बाद उलिहातू गांव की तस्वीर तो बदली,लेकिन धरती आबा के वंशजों की हालत नही बदली। अब भी बिरसा के वंशज टूटे और जर्जर मकान में रहने के लिए मजबूर हैं।





बिरसा के वंशज के पास नहीं हैं पक्के मकान





उलिहातू गांव के जिस घर में भगवान बिरसा मुंडा का जन्म हुआ था,उस घर को दुल्हन की सजाया जा रहा है।खपरैल घर की जगह खूबसूरत घर बनकर तैयार है।घर में बिजली और पानी की पूरी व्यवस्था की गयी है,लेकिन जन्मस्थली के बगल में बिरसा के वंशजों का टूटा और जर्जर मकान खड़ा हुआ है। इसे देखकर आप बहुत दुखी होंगे।बिरसा की जयंती के मौके पर खूंटी से उलिहातू तक सड़कें चमचमा रही हैं।सड़क के किनारे घरों को रंगरोगन कर खूबसूरत बना दिया गया है।कहा जाता है कि चिराग तले अंधेरा।बिरसा के वंशज के घर को उसी हाल में छोड़ दिया गया।रंगाई-पोताई भी नहीं की गयी,बल्कि

जर्जर हालत में ही छोड़ दिया गया।खपरैल घर में 17 से 18 लोग एक साथ रहने के लिए मजबूर हैं।





बिरसा के वंशजों ने बताया कि नेता और मंत्री यहां आते हैं, लेकिन उनसे अभी तक केवल आश्वासन ही मिला है।कई बार लिखित देने के बाद भी घर नहीं बन पाया।घर में एक शौचालय है, वो भी स्वच्छ भारत अभियान के तहत बनाया गया है।पानी के लिए आंगन में एक पानी की टंकी जिसमें नल लगा हुआ है। घर के पीछे की दीवार पर पत्थर निकल आए हैं।





शहीद के नाम पर परिवार के दो लोगों को मिली नौकरी





शहीद के नाम पर बिरसा मुंडा के दो प्रपौत्र को फोर्थ ग्रेड की नौकरी मिली है।बिरसा मुंडा के पौत्र सुखराम मुंडा की पुत्र वधू ने बताया कि नौकरी से उनके पति को इतनी सैलरी नहीं मिलती, जिससे घर की स्थिति को ठीक कराया जाय।बच्चों की पढ़ाई और घर चलाना मुश्किल हो जाता है।





राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से है बड़ी उम्मीदें





बिरसा मुंडा के वंशजों को देश की पहली आदवासी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से बड़ी उम्मीदें हैं।बिरसा मुंडा के पौत्र की पुत्र वधू ने कहा कि जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उनसे मिलेंगी तो उनसे सबसे पहले पक्का मकान बनवाने के लिए आग्रह करूंगी।द्रौपदी मुर्मू भी एक महिला हैं इस नाते महिला का दर्द जरूर समझेंगी।