वाराणसी।बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल अस्पताल में सोमवार को कुख्यात अपराधी मुनीर अहमद की इलाज के दौरान मौत हो गई।मुनीर अहमद ने 2016 में एन‌आईए के डिप्टी एसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना खातून की हत्या कर दी थी।इस मामले में न्यायालय ने मुनीर को फांसी की सजा सुनाई थी।मुनीर सोनभद्र जिला जेल में बंद था।यूरिन इन्फेक्शन होने से उसे क‌ई दिन पूर्व जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।वहां पर हालत में सुधार न होने पर शनिवार को सर सुंदरलाल अस्पताल में लाया गया था।





इसी साल सुनाई गई थी फांसी की सजा





बिजनौर अपर जिला सत्र न्यायाधीश डॉ. विजय कुमार की कोर्ट में इस केस की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान 19 लोगों की गवाही हुई और लगभग 6 साल बाद 21 मई 2022 को गिरफ्तार मुनीर अहमद और रैय्यान को फांसी की सजा सुनाई गई थी।इसके अलावा साथी तंजीम,रिजवान और जैनी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।सजा सुनाए जाने के बाद मुनीर को सोनभद्र जिला जेल में बंद किया गया था। सोनभद्र जिला जेल में बीते 17 नवंबर को मुनीर की तबीयत खराब हुई। उसके बाद उसे सोनभद्र जिला अस्पताल ले जाया गया और फिर वहां से बीएचयू स्थित सर सुंदरलाल अस्पताल लाया गया। सर सुंदर लाल अस्पताल में उपचार के दौरान सोमवार को मुनीर की मौत हो गई।मुनीर पर लूट और हत्या के कुल 33 मुकदमे दर्ज हैं। अलीगढ़ में ही 12 से अधिक केस दर्ज हैं। एनआईए अफसर की हत्या हुई तो मुनीर को गिरफ्तार किया गया। तब कहीं जाकर अपराध की दुनिया में उसके शातिराना अंदाज का पर्दाफाश हुआ।





यूरिन सिस्टम हो गया था डैमेज





चिकित्सकों का कहना है कि मुनीर का यूरिन सिस्टम डैमेज हो गया था और उसे ब्लड प्रेशर की भी शिकायत थी। अधिकारियों द्वारा बताया गया कि डाक्टरों के पैनल द्वारा मृत अपराधी की पोस्टमार्टम की जाएगी। पोस्टमार्टम के दौरान वीडियो भी बनाया जाएगा। उसके बाद उसके शव को परिजनों को सौंप दिया जाएगा।





ऐसे दिया था वारदात को अंजाम





बिजनौर में दो अप्रैल 2016 की रात को एन‌आईए में डिप्टी एसपी रहे तंजील अहमद को हत्यारों ने गोलियां बरसाकर छलनी कर दिया था। तंजील अहमद के शरीर में गोली के घुसने और निकलने के 33 घाव थे,जबकि उनकी पत्नी के शरीर में गोली लगने के छह घाव मिले थे।अत्याधुनिक हथियारों से गोली चलाकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। तंजील अहमद के बेटे शाहबाज और बेटी जिमनिश ने सीट के नीचे घुसकर जान बचाई थी।पूरे हत्याकांड को दो मिनट में ही अंजाम दे दिया गया था।तंजील की हत्या के बाद पूरे देश और केंद्र में हड़कंप मच गया था।





तंजील अहमद अपनी पत्नी फरजाना खातून और बच्चों के संग वैगनआर गाड़ी से बिजनौर जिले के स्योहारा आए थे। 2 अप्रैल 2016 की रात को बंधन बैंक्विट हॉल में भांजी की शादी की रस्मों में उन्होंने भाग लिया। रात में लगभग साढ़े बारह बजे तंजील अपनी पत्नी और दोनों बच्चों के साथ अपने घर सहसपुर के लिए चल दिए।गाड़ी को तंजील अहमद चला रहे थे, पत्नी बराबर वाली सीट पर और बच्चे पिछली सीट पर बैठे थे। उनकी गाड़ी के पीछे उनके भाई रागिब मसूद अपने बच्चों के साथ दूसरी गाड़ी से आ रहे थे। जब तंजील अहमद सहसपुर में ताल कटोरा तालाब के पास निर्माणाधीन पुलिया पर पहुंचे तभी बाइक पर आए दो बदमाशों ने तंजील अहमद और उनकी पत्नी पर गोलियां चला दीं।





साल 2016 में जब तंजील अहमद हत्याकांड को अंजाम दिया गया तो उस वक्त इसकी जांच एनआईए ने भी की। प्रदेश के तीन आईजी इसकी जांच में जुटे थे। शुरुआत में इस हत्याकांड को आतंकी कनेक्शन से जोड़कर देखा गया था, हालांकि बाद में सहसपुर के ही रहने वाले मुनीर और उसके साथी रैय्यान समेत पांच लोगों को आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया गया। पांचों आरोपियों में से तीन को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया, जबकि मुख्य आरोपी मुनीर और रैय्यान को फांसी की सजा सुना दी गई। 20 मई 2022 को बिजनौर कोर्ट से दोषी करार दिया गया था और 21 मई 2022 को मुनीर को फांसी की सजा सुनाई गई।





मुनीर ने स्वीकार किया कि वह अत्याधुनिक हथियार एके-47 खरीदने जा रहा था, ताकि पश्चिमी यूपी और दिल्ली एनसीआर में अपनी किलिंग मशीन ए-कंपनी का डंका बजा सके। मुनीर ने पूछताछ में खुलासा किया कि एके-47 खरीदने के मकसद से उसने बिजनौर में 90 लाख रुपया लूटा था। इस बात की भनक तंजील को लग गई और वह उसकी राह का रोड़ा बनता दिख रहा था। इसलिए उसने तंजील को ही मार दिया।





इस केस की जांच में शामिल रहे अधिकारी अमित पाठक के अनुसार मुनीर ने पूछताछ में स्वीकारा था कि वह बेहद महत्वाकांक्षी हो गया था। उसने जब बिजनौर में अपराध शुरू किया तो उसी के गांव से ताल्लुक रखने वाले एनआईए अफसर तंजील अहमद उसके आड़े आने लगे। उसके विषय में जानकारियां जुटाने लगे और यहां तक कि उसके दो साथियों को भी पकड़ा गया। बाद में वह छूटे। उसे तंजील से खतरा लगा। इसलिए उन्हें मार दिया।





पुलिस के अनुसार स्योहारा थाना क्षेत्र में वर्ष 2016 में एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील अहमद व उनकी पत्नी के हत्याकांड में न्यायालय ने मुनीर अहमद और रैय्यान को दोषी करार देकर फांसी की सजा सुनाई थी। मुनीर अंतरराज्यीय गिरोह का लीडर था। शासन द्वारा चिह्नित राज्य स्तरीय माफिया का नंबर वन अपराधी था। इसके खिलाफ कई राज्यों में 35 मुकदमे हैं। अभी कई और मामलों में सजा कराना बाकी था।