प्रतिनिधि, दरभंगा। रभंगा के मैथिली साहित्य परिषद के दिग्गी पश्चिम में चल रहे तीन दिवसीय नाट्य महोत्सव में कई बेहतरीन प्रस्तुति हुई। अतिथि के रूप मे हमारे बीच ऋषिकेश कुमार (एमपीएसडी/एनएसडी टाई), नारायण जी चौधरी (मैथिली साहित्य परिषद कार्यकर्ता), अमिताभ बच्चन ) उपस्थित रहे।





कार्यक्रम की शुरुआत सुमन कुमार सिंह और टीम की तरफ से लोकगीत की प्रस्तुति की गई। उजागर में शिंगर, सुमन कुमार सिंह, सिद्धार्थ कुमार, सुमन कुमार मंडल और उनके साथ संगत कलाकारों के रूप में, अनीश झा, आशीष कुमार, सूरज कुमार, परमवीर प्रताप सिंह के साथ ही डांस हंट टीम की तरफ से डांस कविरी की काम पर गए। इसके निर्देशक प्रेम सिंघानिया थे। समूह में कजरी नृत्य के मंच पर प्रिया भास्कर, अंजू कुमारी, पिंकी कुमारी, सौम्या कुमारी, रश्मी कुमारी ने शानदार अभिनय किया। नृत्य के बाद नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति किलकारी दरभंगा की ओर की गई। नाटक के लेखक व निर्देशक अमर जी राय थे नाटक में ब्लूश, हर्षित, मनीष, साहिल, मानस, हर्ष, कुणाल ने बेहतरीन प्रस्तुति दी।





दरभंगा रंग महोत्सव में दो नाटकों के प्रदर्शन हुए। नामांकित थियेटर असम की ओर से नाटक कड़वा सच की घोषणा की जिसका निर्देशन मर्सी कृष्णा नाथ (इंडियन फिल्म सेंसर बोर्ड के सदस्य, एवं कला एवं संस्कृति विभाग के सदस्य) ने किया। कड़वा सच एक लोक कलाकार के जीवन का वह सच है जो आम है देखने और देखने की दृष्टि नहीं है। कड़वा सच नाटक में एक लोक कलाकार के जीवन के संघर्ष को बड़ी खूबसूरती के साथ उकेरा गया है। नाटक में कलाकार की इस हालत के लिए जिम्मेदार समाज को उसकी जिम्मेवारी याद दिलाई गई। रोसे की भूमिका में रवि रौज, ज्योति की भूमिका में निकिता कुमारी, विमान की भूमिका में रवि वर्मा, रोहित वर्मा, अंजारूल हक, मनोज हक, मनोज कुमार, पूरबी रंजन ने दर्शकों को झकझोर कर रख दिया। महोत्सव की दूसरी प्रस्तुति मैं नास्तिक हूं लेखक व निर्देशक मृत्युंजय शर्मा प्रस्तुति थियेटर पुत की थी। नाटक की कथा कथा भगत सिंह के जीवन पर केंद्रित है भगत सिंह के नास्तिकता के तर्क को यह नाटक बखूबी मंच पर व्यक्त करती है और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भारत के ब्रिटिश उपनिवेश होने की प्रतिबद्ध भी यह नाटक करती है भगत सिंह जेल में लिंग को पढ़ रहे हैं उन्हीं से उन्हें सूचना मिलती है कि आज वे चल रहे हैं और चतर सिंह उनसे पूजा करते हैं और गुरु ग्रंथ साहिब ब्लॉक रीडिंग को कहते हैं। भगत सिंह अंतिम सावन को अपने जन्म से लेकर अब तक की घटनाओं को अजीब तरह से याद करते हैं जिन्हें उन्होंने नास्तिक बनाया था। उनकी समस्त क्रांतिकारी गतिविधियों से यह नाटक दर्शकों को परिचित करवाता है और भगत सिंह की दृष्टि और नेतृत्व की छवि को उजागर करता है। एकल अभिनय कुमार के द्वारा प्रस्तुत की गई संगीत संयोजन जीशान सबीर, प्रकाश परिकल्पना विकी राजवीर द्वारा की गई। उत्सव को सफल बनाने में कलर व्हील संस्था के सचिव सह-निर्देशक श्याम कुमारियां(एनएसडी) और सदस्य विक्रम ठाकुर, रिषभ कुमार, निकु कुमार, निकिता कुमारी, रोहित वर्मा, रवि वर्मा, रौशन कुमार, विशाल कुमार, आदित्य कुमार, राजेश शर्मा , मोहम्मद असलम, गौरी ने पूरा कार्यक्रम बखूबी सम्भाला।