वाराणसी।आध्यात्मिक नगरी काशी के काशी विश्वनाथ धाम आने वाले बाबा के भक्तों के लिए भीषण गर्मी आफत बन गयी है।देश के कोने-कोने से आने वाले बाबा विश्वनाथ के भक्तों के पांव तपती दोपहरी में जलने लगे हैं।धाम परिसर में लगाए गए पत्थरों पर कुछ जगह पर कार्पेट जरूर बिछी है,लेकिन उसका दायरा सीमित है।सिर पर कोई छांव न होने के कारण बुजुर्गों और दिव्यांगों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। भक्तों का इन दिनों बुरा हाल है।आग की तरह तप रहे पत्थरों पर नंगे पांव चलना बेहद कष्टकारी हो गया है।
जिस तरह से भीषण गर्मी पड़ रही है,उससे गर्भगृह तक पहुंचने में भक्तों को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।खास तौर पर गंगा द्वार से आने वाले भक्तों को कहीं छाया न होने और गंगा द्वार से गर्भगृह की दूरी ज्यादा होने से मंदिर आने वालों भक्तों के पांव जल रहे हैं और दौड़ लगाते हुए गर्भगृह तक पहुंचना पड़ रहा है।
आपको बता दें कि 700 करोड़ रुपए से भी ज्यादा की लागत से बनकर तैयार हुए काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण 13 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।जून के महीने में गर्मी के टूटते रिकॉर्ड ने काशी विश्वनाथ मंदिर आने वाले भक्तों की भी अग्निपरीक्षा लेनी शुरू कर दी है।विशाल रूप ले चुके विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर में रोजाना सैकड़ों लोग दर्शन करने के लिए आते हैं।आसमान से बरस रही आग ने भक्तों को परेशान कर दिया है।ऐसे में धाम के गेटवे ऑफ कॉरिडोर की राह भक्तों के लिए कठिन होती जा रही हैं। दशाश्वमेध घाट से लेकर ललिता घाट तक न तो पानी न तो छांव का इंतजाम है।धाम की प्रवेश द्वार सीढ़ियों से 500 मीटर की दूरी तय करने के बाद ही छांव नसीब हो रहा हैं।
आये दिन भीषड़ गर्मी से बेहोश हो रहे भक्तों की हालत को देखकर मण्डलायुक्त ने औचक निरीक्षण करते हुए कैनोपी व मैट बिछाने का आदेश दिया है,हालांकि कई जगह कैनोपी लगी है पर वो नाकाफी साबित हो रही है।इसको देखते हुए काशी विश्वनाथ धाम आने वाले भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है।मंदिर प्रशासन श्री काशी विश्वनाथ धाम में स्थाई शेड लगवाने जा रहा है।अब कैनोपी की ही तरह के स्थाई शेड लगाए जाएंगे। ये स्थाई शेड धाम में आने वाले चारों द्वार पर लगाए जाएंगे।





