भारत में सिरदर्द, बदन दर्द या जोड़ों की तकलीफ होते ही बिना डॉक्टर की पर्ची के मेडिकल स्टोर से पेनकिलर (दर्द निवारक दवा) खरीदकर खा लेना एक आम घरेलू आदत बन चुका है। लेकिन, बिना सोचे-समझे दर्द दबाने की यह जल्दबाजी अब एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी का रूप ले रही है। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (BMJ) की एक ताज़ा स्टडी और भारत के सर्वोच्च दवा नियामक सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) की नई चेतावनी ने देशवासियों की इस लापरवाही पर चिंता के बड़े संकेत दिए हैं।

विशेषज्ञों का साफ कहना है कि हर दर्द का इलाज सिर्फ एक गोली नहीं है। बिना चिकित्सीय परामर्श के बार-बार पेनकिलर लेने की यह आदत आपकी किडनी को हमेशा के लिए पूरी तरह बेकार कर सकती है।

"लंबे समय तक बिना निगरानी के दर्द निवारक गोलियां खाना किडनी की कार्यक्षमता को तेजी से कम कर देता है। प्रिस्क्रिप्शन दवाएं केवल तय अवधि और निश्चित खुराक में ही ली जानी चाहिए।" — प्रोफेसर संदीप महाजन, नेफ्रोलॉजिस्ट (AIIMS, नई दिल्ली)

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CDSCO की सख्त चेतावनी: क्यों खतरे में है आपकी किडनी?

CDSCO ने हाल ही में NSAIDs (Non-Steroidal Anti-Inflammatory Drugs) और एंटीबायोटिक्स के अनियंत्रित और लंबे समय तक इस्तेमाल को लेकर एक एडवाइजरी जारी की है।

NSAIDs दवाएं दर्द और सूजन से तुरंत राहत देती हैं, लेकिन बिना डॉक्टर की देखरेख के गलत मात्रा में इनका सेवन करने से किडनी में रक्त का प्रवाह प्रभावित होता है। अगर कोई व्यक्ति पहले से ही किडनी की किसी हल्की समस्या से जूझ रहा है या पानी कम पीता है, तो इन दवाओं का साइड इफेक्ट कई गुना बढ़ जाता है।

"NSAIDs का गलत और अनियंत्रित इस्तेमाल गंभीर 'एक्यूट किडनी इंजरी' (AKI) का मुख्य कारण बन सकता है। जिन मरीजों को पहले से किडनी संबंधी शिकायत है, उनके लिए पेनकिलर की एक खुराक भी बेहद जोखिम भरी हो सकती है।" — डॉ. दिनेश खुल्लर, नेफ्रोलॉजिस्ट (मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साकेत)

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BMJ स्टडी का चौंकाने वाला खुलासा: 76.6% लोग ले रहे हैं दवाएं

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (BMJ) द्वारा किए गए एक व्यापक अध्ययन में देश भर के 15,587 ऐसे लोगों के आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया गया, जिनकी उम्र 45 वर्ष या उससे अधिक थी और जिनका दैनिक जीवन व काम दर्द की वजह से प्रभावित हो रहा था। इस स्टडी से चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिनके अनुसार दर्द से पीड़ित 76.6% लोग किसी न किसी रूप में दवा का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें से लगभग 46.02% लोग दर्द दूर करने के लिए सीधे पेनकिलर गोलियों का सहारा लेते हैं, जबकि 45.21% लोग मलहम या बाहरी सेक जैसे तरीकों का उपयोग करते हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि केवल 8.06% लोगों ने ही डॉक्टर की लिखित सलाह के अनुसार दवा ली है।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि दर्द की दवाएं लेने की प्रवृत्ति अलग-अलग राज्यों में काफी भिन्न है। उदाहरण के तौर पर, पुडुचेरी में दर्द के उपचार का उपयोग सबसे अधिक 92.17% देखा गया, जबकि मिजोरम में यह सबसे कम 20% दर्ज किया गया। केवल पेनकिलर गोलियों के इस्तेमाल की बात करें तो तेलंगाना 68.33% के साथ देश में सबसे आगे है, वहीं सिक्किम में यह आंकड़ा सबसे कम 3.33% पाया गया।

डेमोग्राफिक पैटर्न पर नज़र डालें तो इस अध्ययन में शामिल लोगों में 64% महिलाएं और 74% ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी थे। उम्र के लिहाज से 75 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों की तुलना में 45 से 74 वर्ष के आयु वर्ग में पेनकिलर खाने की प्रवृत्ति ज्यादा देखी गई। इसके अलावा, संपन्न परिवारों और ग्रामीण क्षेत्रों में दर्द निवारक दवाओं की मांग व उपलब्धता अधिक पाई गई। मुख्य रूप से दांतों में दर्द, अर्थराइटिस (हड्डी-जोड़ों का दर्द), कैंसर, हाई ब्लड प्रेशर और पाचन संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोग पेनकिलर का सेवन सबसे ज्यादा कर रहे हैं।

विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने इस स्थिति पर गंभीर चेतावनी दी है। बिना चिकित्सकीय सलाह के पेनकिलर लेना भले ही अस्थायी राहत दे दे, लेकिन यह मूल बीमारी के लक्षणों को छिपा देता है, जिससे सही समय पर सही इलाज मिलने में देरी हो जाती है। इसलिए सलाह दी जाती है कि लोग स्वयं डॉक्टर न बनें और छोटी-मोटी तकलीफ में तुरंत गोली खाने के बजाय पर्याप्त पानी पीकर, आराम करके या सुरक्षित घरेलू उपाय अपनाकर देखें। यदि दर्द 24 से 48 घंटे से अधिक समय तक बना रहता है, तो विशेषज्ञ से परामर्श करना अनिवार्य है। इसके साथ ही, यदि डॉक्टर ने कोई पेनकिलर लिखी भी है, तो उसे निर्धारित दिनों से एक भी दिन ज्यादा न खाएं।