नई दिल्ली

देश में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे लाखों मरीजों और उनके परिवारों के लिए राहत भरी बड़ी खबर आई है। उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की सख्त टिप्पणी और फटकार के बाद केंद्र सरकार ने कैंसर की दवाओं के दामों में ऐतिहासिक कटौती की घोषणा की है। सरकार ने लगभग 397 आवश्यक कैंसर दवाओं के मूल्य नियंत्रित करते हुए उनकी कीमतों में 85 प्रतिशत तक की भारी कमी कर दी है। दवा नियंत्रक प्राधिकरण द्वारा जारी यह नई दरें 9 नवंबर 2026 से देशभर में प्रभावी हो जाएंगी।

कीमतों में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट: प्रमुख उदाहरण

सरकार के इस कदम से कई बेहद महंगी और जीवनरक्षक दवाओं की दरें फर्श पर आ गई हैं। रुपये और प्रतिशत दोनों के लिहाज से कई दवाओं पर रिकॉर्ड राहत मिली है:

  • सैमटेपा (Samtepa - थियोटेपा 100 मिग्रा इंजेक्शन): इस 1 वायल इंजेक्शन की कीमत में सबसे भारी कटौती दर्ज की गई है। ₹80,071.86 में मिलने वाला यह इंजेक्शन अब सीधे घटकर मात्र ₹7,150.33 का रह गया है। यानी सीधे ₹72,921.53 (लगभग 91.1%) की महा-बचत!
  • पाल्बोप्रो (Palbopro - पाल्बोसिक्लिब 125 मिग्रा, 21 कैप्सूल): प्रतिशत के मामले में सबसे बड़ी गिरावट इस दवा में हुई है। पहले ₹40,421.33 में मिलने वाला कैप्सूल पैक अब मात्र ₹2,720.00 में उपलब्ध होगा। इसमें 93.3% (₹37,701.33) की रिकॉर्ड कमी आई है।
  • हरटुमैब (Hartumab - परटुज़ुमैब 30 मिग्रा): इसकी कीमत ₹94,951 से घटकर ₹30,593 हो गई है, जिससे मरीजों को ₹64,358 का सीधा फायदा होगा।
  • इवज़ुमैब 400 (Ivzumab - बेवाकिज़ुमैब): ₹69,852.12 की यह दवा अब ₹13,512 में मिलेगी (₹56,340 सस्ती)।
  • बेवाकिजैब 400 (Bevacizab): इसका दाम ₹65,205.09 से घटकर मात्र ₹8,956.75 रह गया है, जो ₹56,248 तक सस्ती हुई है।

पेटेंटेड और मूल दवाओं के दाम में बदलाव नहीं

जहाँ एक तरफ 397 जेनेरिक और अन्य ब्रांडेड दवाओं के दाम बेहद कम किए गए हैं, वहीं मूल और पेटेंट वाली विदेशी दवाओं (Patented Drugs) के दामों को इस कटौती से बाहर रखा गया है।

  • कीट्रूडा (Keytruda)
  • टाग्रिसो (Tagrisso)
  • ओपडायटा (Opdyta)
  • लेनविमा (Lenvima)
  • वेनक्लेक्सटा (Venclexta)

इन पेटेंटेड दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है और वे पहले जैसी पुरानी कीमतों पर ही उपलब्ध रहेंगी।

सुप्रीम कोर्ट के रुख का असर

उल्लेखनीय है कि देश में कैंसर के इलाज की अत्यधिक लागत और जीवनरक्षक दवाओं के मनमाने दामों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत के इस सख्त रुख के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने तत्काल कदम उठाते हुए दवाओं की कीमतों की सीमा तय की, जिससे आम और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को काफी हद तक कम किया जा सके।

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