प्रतिनिधि,हज़ारीबाग़।बरकट्ठा प्रखंड सूर्यकुंड धार्मिक आस्था और विज्ञान के संगम स्थल के रूप में विख्यात प्राकृतिक उदभव गर्मजल झरना स्त्रोत सूर्यकुंड में मकर संक्रांति के अवसर पर लगने वाले 15 दिवसीय विशाल मेले के आयोजन को लेकर तैयारी जोरों पर है।मेला ठेकेदार पांच पांडव कमिटी के श्यामकांत पांडेय के मुताबिक मेले में थियेटर, मौत का कुआं, मीना बाजार, झूला, जादूघर समेत कई खेल तमाशा लगेगा। विदित हो कि क्षेत्र में भी सूर्यकुंड मेले को लेकर लोंगो में उत्साह है। कोरोनकाल के कारण दो वर्ष से मेले का आयोजन नहीं हुआ। इस वजह से लोग उत्साहित हैं। मेला 14 जनवरी से शुरू होगा। जो 30 जनवरी को समापन होता है।
क्या खास है सूर्यकुंड और मकर संक्रांति
सूर्यकुंड परिसर में पांच कुंड है। सभी कुंडों में अविरल गर्म और शीतल जल का धरती के गर्भ से प्रवाहित होता है। इनमें सबसे अधिक गर्मकुंड सूर्यकुंड है। इसका तापमान साढ़े 88 डिग्री सेल्सियस है। इसके किनारे किनारे चार कुंड है। इन सभी कुंडों के जल का तापमान क्रमशः निम्न है। जो सीता कुंड, लक्ष्मण कुंड, राम कुंड और ब्रह्म कुंड है। सबसे अधिक ठंडा शीतल कुंड है। सूर्यकुंड में पौराणिक माता विरंची का प्रतिमा है। इसके अलावे काली मंदिर, सात रथों पर सवार भगवान सूर्य की प्रतिमा, शिवालय, भगवान राम सीता की प्रतिमा है। श्रद्धालु सालों भर यहां श्रद्धा के साथ देवी देवता और सूर्यकुंड का दर्शन करने पहुंचते हैं। मकर संक्रांति के दिन सूर्यकुंड के जल से स्नान के लिए हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। स्नान के बाद सूर्यकुंड की पूजा करने के बाद लोग चूड़ा, दही और तिलकुट दान करने के बाद खुद ग्रहण करते हैं। मन जाता है कि गंगासागर में मकर स्नान का फल सूर्यकुंड जल से स्नान का पुण्य प्राप्ति होती है।





