कोविड-19 के संदर्भ में शिव शिष्य हरिंद्रानंद फाउंडेशन व शिव-शिष्य परिवार ने जारी किए दिशा-निर्देश
शिव चर्चा की सूचना मुख्यालय को अवश्य दें
प्रशासन के दिशा-निर्देशों का अनुपालन हर हाल में करें:अर्चित आनंद
विशेष संवाददाता
रांची।शिवशिष्य हरीन्द्रानंद फाउंडेशन/शिव शिष्य परिवार/ वैश्विक शिव शिष्य परिवार, रांची द्वारा वैश्विक महामारी कोरोना के संदर्भ में आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। इस संबंध में साहब श्री हरिंद्रानंद के आप्त सचिव अर्चित आनंद ने कहा है कि कोरोना एक नये स्वरूप में फिर से अपना पैर पसार रहा है,इसका मतलब की कोरोना अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।उसका नया वैरिएंट ज्यादा घातक और संक्रामक है। साथ ही टीकाकरण की प्रक्रिया भी चल रही है।मुख्यालय की ओर से सभी से अनुरोध किया गया है कि टीका/बूस्टर डोज अवश्य लें।सभी तरह की शिवचर्चा यथा साप्ताहिक, मासिक,एकदिवसीय शिवचार्चाओं में कोविड से संबंधित सरकारी निर्देशों का पूर्णतया अनुपालन होना सुनिश्चित किया जाय।
उन्होंने कहा कि आजकल यह भी पाया जा रहा है कि कुछ गुरुभाई/बहन क्षेत्रों में वृहत/बड़े स्तर पर शिवचार्चाएं आयोजित कर रहे हैं, लेकिन उसकी सूचना न तो मुख्यालय को होती है, न ही इसके लिए स्थानीय प्रशासन से अनुमति ली जाती है। सभी को जानकारी होगी की अभी आसनसोल (प.बंगाल)में कुछ लोगों द्वारा शिवचर्चा के नाम पर गुरूभाई/बहनों को इकट्ठा किया गया। वहां भगदड़ में तीन लोगों की दुःखद मौत हो गयी और कई घायल हो गए,उड़ीसा की घटना का भी संदर्भ करें।उन्होंने कहा कि हमारे आचरण से हमारे गुरु शिव की बदनामी नहीं हो, साथ ही साहब दीदी के उद्देश्यों पर कोई आंच न आए, ऐसा प्रयास अनवरत करें।
उन्होंने कहा कि यह भी पाया गया है कि कई जगहों पर कुछ तथाकथित लोग शिवचर्चा के नाम पर शिवशिष्यों/शिष्याओं को भ्रमित करके चंदा इकट्ठा करते हैं और भीड़ इकट्ठी करते हैं,वैसे लोग सावधान हो जायें, अन्यथा कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
उन्होंने आग्रह किया है कि सरकार द्वारा दिये गए निर्देशों/नियमों के अनुसार ही कोई भी शिवचर्चा का आयोजन करें। मुख्यालय(रांची) द्वारा लिखित अनुमति से जो कार्यक्रम क्षेत्रों में होंगे, मुख्यालय/द्वये ट्रस्ट/संस्था उसी कार्यक्रम की जिम्मेवारी लेगा, अन्यथा कार्यक्रम में हुए किसी भी तरह की अव्यवस्था/घटना/दुर्घटना के लिए आयोजक स्वयं जिम्मेवार होंगे।साहब श्री ने “चतुर्थ परिपत्र”में कार्यक्रम के लिए स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है, उसका अवलोकन करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि हमारा आपका उद्देश्य एक, रास्ता एक,मंजिल एक और गुरु भी एक, इसलिए सबको साथ लेकर चलने का प्रयास हो।दीदी नीलम आनंद कहती थी न कि कोई टूटे नहीं,कोई छूटे नहीं।साहब हरीन्द्रानंद के विचार और उनकी वाणी को हमें आजीवन आत्मसात करना है।





