रांची।भारतीय जनता पार्टी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद झारखंड की राजधानी में शुक्रवार को जुमे के बाद नंगा नाच और जमकर हिंसा हुई।उपद्रवियों की पत्थरबाजी में जहां कई पुलिसकर्मियों समेत बड़ी संख्या में लोग घायल हुए तो दो युवकों की कथित तौर पर पुलिस फायरिंग में मौत हो गई। इस्लामिक संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने इन्हें शहीद बताते हुए सरकार से मुआवजे की मांग की है।
पुलिस पर मुस्लिम प्रदर्शनकारियों पर जुल्म करने का आरोप लगाते हुए जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव एम हकिमुद्दीन कासमी ने कहा कि सरकार को घायलों का इलाज करना चाहिए और शहीदो के परिवार वालों को मुआवजा दिया जाए।उन्होंने टाइम्स नाउ से बातचीत में कहा कि डीआईजी साहब से बात की है कि जिस तरह पुलिस द्वारा बर्बरता की गई है।आपके जरिए उसकी भी जांच हो।चूंकि आप अच्छे अधिकारी है, जो लोग इस हादसे में शहीद हुए हैं।उनके घरवालों को सही मुआवजा मिले।जो कसूरवार हैं उन्हें सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एसआईटी बना दी गई है। जांच कर रहे हैं। कसूरवार को वाकई सजा मिलनी चाहिए, बेवजह किसी की गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए।
कासमी ने ना सिर्फ मृतकों को शहीद बताया बल्कि उपद्रवियों के नंगा नाच को महज हादसा बताया। उन्होंने कहा कि और भी जगहों पर हालात पैदा हुए, लेकिन रांची में जो हादसा हुआ इससे सिर्फ रांची, झारखंड नहीं पूरे मुल्क में बहुत बदनामी हो रही है, उससे आपको अपने सूबे को बचाना चाहिए। रोकने के और भी बहुत से तरीके हैं, लेकिन अचानक गोली चला दी गई, इस जमहूरी मुल्क के ढांचे को बर्बाद किया जा रहा है, यह बात मुनासिब नहीं है।
मृतकों के परिजनों का दावा, प्रदर्शन में नहीं थे शामिल
शुक्रवार को हिंसा के दौरान कथित तौर पर पुलिस की फायरिंग में मारे गए दो लोगों के परिजनों ने दावा किया है कि वे जुलूस का हिस्सा नहीं थे। रांची में हुए उपद्रव में जहां मोहम्मद मुद्दसिर कैफी और मोहम्मद साहिल की मौत हो गई तो दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। शाहिल के भाई शाकिब अंसारी ने दावा किया कि वह शुक्रवार को प्रदर्शन में शामिल नहीं था वह नमाज के बाद कुछ काम से मेन रोड गया था। कैफी के पिता अफजल ने भी कहा कि उनका बेटा प्रदर्शन में शामिल नहीं था, पता नहीं उसे गोली कैसे लगी।





