प्रतिनिधि,जमशेदपुर। जुगसलाई स्थित श्री राजस्थान शिव मंदिर परिसर में जीवन प्रबंधन गुरू पंडित विजयशंकर मेहता की संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का समापन सातवें दिन शुक्रवार सुमधुर भजनों और हवन पूजन के साथ हुआ। सुबह 10 बजे व्यास पीठ से पंडित मेहता ने उद्धव गीता, भगवान का स्वधाम गमन, परीक्षित मोक्ष आदि प्रसंगों की व्याख्या परिवार प्रबंधन और समर्पण सूत्र के आधार पर की। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा भी सुना।
कथा की पूर्णाहुति पर स्थानीय पुजारी मूलचंद शर्मा, दीपक जोशी, सत्यनारायण शर्मा और मनीष शर्मा गोलू ने संयुक्त रूप से हवन पूजा कराई। पूजा के मुख्य यजमान बीणा-जयराम चौधरी थे। वहीं पुजारी मूलचंद शर्मा ने बताया कि हवन में काम ली जाने वाली जड़ीबूटी युक्त हवन सामग्री, शुद्ध घी, पवित्र वृक्षों की लकड़ियां, कपूर, नारियल आदि के जलने से उत्पन्न अग्नि और धुएं से वातावरण शुद्ध होता है। साथ ही वायुमंडल में विद्यमान सभी प्रकार की महामारियों के विषाणु भी नष्ट होते हैं। अतः वातावरण को शुद्ध बनाने के लिए हमें हवन अवश्य करना चाहिए।
सात दिवसीय इस धार्मिक कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से जयराम, नवनीत, निकेश, रतन, पुरूषोतम, आनन्द, विशाल, मनोहर, बंटी, सुनील, बिल्लू, श्रवण, निशी, नेहा, श्वेता, सुरेश, विष्णु, कैलाश, अमित, अनुप समेत चौधरी परिवार के सभी सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। साथ ही समापन के दिन कथा में उन्होंने कहा कि जीवन में अहंकार नहीं पालना चाहिए। जिसने जन्म लिया हैं, उसे एक दिन मौत आनी ही हैं। भागवत मरने की कला सिखाती हैं। यह मोक्ष का ग्रंथ हैं। कृष्ण ने उद्धव से कहा था कि मुझे पाना हो तो सत्संग करना पड़ेगा। भगवान श्रीकृष्ण हमें यह संदेश देते हैं कि 11 काम योग, ज्ञान, धर्म का पालन, स्वयं का अध्ययन, तपस्या, त्याग, सेवा कार्य, दान, तीर्थ, वेद, यम-नियम करने के बाद भी मुझे वश में नहीं कर सकता। सिर्फ सत्संग मुझे वश में कर सकता हैं।
कथा के दौरान पंडित मेहता ने कहा कि परमात्मा को प्राप्त करने के लिए मन, वचन और कर्म से एक हो जाएं। जब कोई किसी से सार्वजनिक रूप से मिलता हैं तो कहता हैं कि अरे वाह बहुत दिनों बाद मिले। उसी समय मन कहता है कि ये दुष्ट अभी दिखना था। सब लोग यही कर रहे हैं। सोचिए दुनिया से तो छुपा लेंगे। मगर उपर वाले की अदालत में तो सोचने पर भी दंड मिलता हैं।
कथा में समाजसेवी रामगोपाल बंसल (कोलकाता) और दिलीप गोयल ने शामिल होकर पंडित मेहता से आशीर्वाद भी लिया। हवन पूजन के बाद सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। जबकि पंडित विजय शंकर मेहता ने कथा की व्याख्या परिवार प्रबंधन के सात सुत्रों के आधार पर की। पहले दिन-संयम, दूसरे दिन-संतुष्टि, तीसरे दिन-संतान, चौथे दिन-संवेदनशीलता, पांचवें दिन-संकल्प, छठे दिन-सक्षम और सातवें दिन-समर्पण के आधार पर कथा की संगीतमयी व्याख्या की। इस दौरान सातो दिन संगीतज्ञ विशेष ठाकुर, पंडित सरल ज्ञानी, बाबूलाल सूर्यवंशी, शरद माथुर और कमल शर्मा की संगत ने कथा से जुड़े प्रसंगों के आधार पर भजनों की शानदार प्रस्तुति भी दी।





