मैनपुरी।संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) का परिणाम मंगलवार को घोषित हो गया है।उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जनपद के कसवा कुरावली के मोहल्ला घरनाजपुर के रहने वाले दिव्यांग सूरज तिवारी ने यूपीएससी परिक्षा में 917वीं रैंक हासिल की और आईएएस बने।सूरज की इस उपलब्धि से उनके परिवार और कस्बे में खुशी का माहौल है और लोग सूरज के घर जाकर उसे बधाइयां दे रहे हैं।ट्रेन हादसे में सूरज ने अपने दोनों पैर और एक हाथ को गवां दिया था।सूरज ने हिम्मत नहीं हारी और यूपीएससी परीक्षा पास की।सूरज ने दिल्ली में रहकर आईएएस की तैयारी की और अपने पहले प्रयास में ही सफलता हासिल की।सूरज की इस कामयाबी पर पूर्व मुख्यमंत्री समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी खुश हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्वीट करके कहा कि मैनपुरी के दिव्यांग सूरज तिवारी ने आईएएस की परीक्षा पहली बार में ही निकाल कर साबित कर दिया कि संकल्प की शक्ति अन्य सब शक्तियों से बड़ी होती है।सूरज की इस सूरज’ जैसी उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई और उज्ज्वल भविष्य के लिए अनंत शुभकामनाएं।
किसी ने सच ही कहा है
ये तेरा ही सफर है
मंज़िल की ओर तेरा
पहला ही ये कदम है
ये तेरा फैसला है
बिना रुके कहते हुए चला है
किनारा पाकर ही दम लेगा
आज जिद पे तू अड़ा है।।
सूरज तिवारी ने लोगों के सामने एक मिसाल पेश की है कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हो,लेकिन कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।आश्चर्य की बात है कि सूरज के दोनों पैर और एक हाथ नहीं है और दूसरे हाथ में केवल तीन उंगलियां है, लेकिन ये सूरज की मेहनत और लगन ही थी जो आज सूरज ने ये कामयाबी हासिल की है।यूपीएससी की परीक्षा पास करने के लिए सूरज ने 18 से 20 घंटे तक पढ़ाई की। बिना किसी कोचिंग व एक्स्ट्रा क्लासेज के हासिल की है।
सूरज तिवारी एक मध्यमवर्गीय परिवार से हैं। सूरज के पिता राजेश तिवारी टेलर हैं और इनकी एक छोटी सी सिलाई की दुकान कुरावली में है, जिससे परिवार का खर्चा चलता है। 2017 में एक ट्रेन हादसे में सूरज में अपने दोनों पैर और एक हाथ को गवां दिया था। 4 महीने तक सूरज का इलाज चला था।घर की आर्थिक हालत और खराब होने लगी और उसके कुछ समय बाद सूरज के एक भाई की भी मौत हो गई थी। इस घटना से पूरा परिवार दुखी था,लेकिन सूरज ने हिम्मत नहीं हारी और अपने लक्ष्य पर एकाग्र होकर ये सफलता का परचम लहराया है।





