नई दिल्ली: भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर द्वारा अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना (PLA) के साथ गतिरोध की पुष्टि किए जाने के बाद देश की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। आईटीबीपी प्रमुख के इस खुलासे के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार की चीन नीति पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सीमाई तनाव, रिकॉर्ड व्यापार घाटे और भारत की रणनीतिक स्थिति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार से कई गंभीर सवाल किए हैं।
तक्षिंग और असाफिला में क्या है सीमा विवाद?
मीडिया रिपोर्ट्स और सरकारी सूत्रों के हवाले से सामने आया है कि पिछले कुछ महीनों से अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के तक्षिंग और असाफिला क्षेत्र में भारत और चीन के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है:
- चीनी सेना के टेंट: रिपोर्ट के अनुसार, पीएलए (PLA) के सैनिकों ने कथित तौर पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से अंदर भारतीय क्षेत्र में टेंट लगा लिए हैं।
- सैन्य और कूटनीतिक संवाद: इस गतिरोध को सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच वर्किंग मेकैनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC), विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता और पूर्वी सेक्टर में पहली बार कोर कमांडर स्तर की बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं, ताकि सीमा पर शांति और स्थिरता कायम की जा सके।
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कांग्रेस नेता जयराम रमेश के मुख्य सवाल और आरोप
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के जरिए केंद्र सरकार पर निम्नलिखित मुद्दों को लेकर गंभीर प्रहार किए हैं:
- सरकार की चुप्पी पर सवाल: आईटीबीपी के डीजी द्वारा सीमा पर सैनिकों के संघर्ष और शौर्य कमांडो की सराहना किए जाने के बाद, कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री और सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कुछ बोलने से बच रहे हैं।
- पेंट्रोलिंग पॉइंट्स तक पहुंच: स्थानीय लोगों के हवाले से दावा किया गया है कि लद्दाख की तरह ही अरुणाचल प्रदेश में भी भारतीय गश्त दलों (Patrolling Points) की पहुंच कुछ स्थानों पर सीमित या बाधित हुई है।
- पर्यावरण और जल सुरक्षा: कांग्रेस ने चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने की एकतरफा कोशिशों और ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाए जा रहे 60,000 मेगावाट क्षमता के विशाल बांध को भारत की जल और पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है।
- रिकॉर्ड 112 अरब डॉलर का व्यापार घाटा: जयराम रमेश ने भारत-चीन आर्थिक संबंधों पर कड़ा रुख अपनाते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जहां भारत का निर्यात 19.47 अरब डॉलर और आयात 131.63 अरब डॉलर रहा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इससे घरेलू सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) पर गंभीर दबाव पड़ा है।
एक तरफ जहां आईटीबीपी अपनी नई 'शौर्य कमांडो' इकाई, उन्नत ड्रोन युद्ध क्षमताओं और भूमिगत आश्रय स्थलों के जरिए एलएसी पर सुरक्षा को अभेद्य बनाने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर सीमा पर जमीनी तनाव और आर्थिक आंकड़ों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
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