नई दिल्ली: 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान CJP आंदोलन, रिजीम चेंज और देश के मौजूदा राजनीतिक हालातों पर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत जैसे देश में नेपाल, बांग्लादेश या फ्रांस जैसी हिंसक क्रांतियों वाली स्थिति पैदा नहीं हो सकती, क्योंकि हमारी ऐतिहासिक और वैचारिक विरासत पूरी तरह अलग है।
मुख्य बातें और अभिजीत दीपके के बयान:
- छात्रों के प्रदर्शन में कोई हिंसा नहीं: दीपके ने कहा कि जंतर-मंतर पर देश का इतना बड़ा प्रोटेस्ट हुआ, लेकिन छात्रों की तरफ से कोई हिंसा नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके उलट पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की।
- मीम्स के जरिए विरोध और शांति की लेगेसी: उन्होंने कहा कि आज के छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर हिंसक होने के बजाय पीएम मोदी और सरकार के खिलाफ सिर्फ 'मीम्स' बना रहे हैं। दीपके ने जोर देकर कहा, "हम बचपन से महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर को पढ़कर बड़े हुए हैं। हमारा आजादी का आंदोलन भी पूरी तरह शांति पर टिका था।"
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- सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी पर सवाल: सौरव दास और आशुतोष रांका के मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि तिरंगा लहराने जैसे मुद्दों पर उन्हें 7 दिन तक जेल में रखा गया। दीपके ने तंज कसते हुए कहा कि जेल में बंद उन युवाओं को देखकर उनके मन में आता था कि उन्हें भी उन्हीं के साथ जेल में बंद कर दिया जाए, क्योंकि उनकी कोई और गलती नहीं थी।
- फ्लाइट से गिरफ्तारी और ज्ञानेश कुमार पर निशाना: अपनी खुद की गिरफ्तारी का अनुभव साझा करते हुए दीपके ने दावा किया कि इतिहास में इससे पहले कभी किसी को फ्लाइट में घुसकर इस तरह बीच रास्ते से हिरासत में नहीं लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब सिर्फ ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए सरकार द्वारा किया गया, और सवाल उठाया कि आखिर वे सरकार के लिए इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं।
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