पेरिस:
यूरोपीय देश फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था के मुद्दों को लेकर उपजा आक्रोश अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक संकट में बदल गया है। रविवार (18 अक्तूबर) को एजुकेशन सुधार की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हजारों वामपंथी प्रदर्शनकारी सीधे देश के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के आधिकारिक आवास, एलिसी पैलेस के बेहद करीब पहुंच गए। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि गृह मंत्री को यह स्वीकार करना पड़ा कि पुलिस ने कानून-व्यवस्था पर से अपना नियंत्रण खो दिया था।
एलिसी पैलेस के पास हुई भीषण झड़प
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति आवास एलिसी पैलेस से महज 300 मीटर की दूरी पर पहुंच गए थे। सुरक्षा के लिहाज से वहां पहले से की गई बैरिकेडिंग को तोड़ने की कोशिश के दौरान उग्र भीड़ और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों की संख्या इतनी अधिक थी कि मौके पर मौजूद पुलिस बल उनके सामने बेबस नजर आया।
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए पुलिस ने तुरंत आंसू गैस के गोले दागे, जिसके बाद भीड़ तितर-बितर होने लगी। इसके तुरंत बाद वहां 'राइट कंट्रोल फोर्स' (दंगा नियंत्रण बल) को तैनात किया गया और राष्ट्रपति भवन के आसपास सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई।
गृह मंत्री ने की इस्तीफे की पेशकश, मैक्रों ने नकारा
सोमवार (19 अक्तूबर) को फ्रांस के गृह मंत्री ने एक आधिकारिक बयान में स्वीकार किया कि प्रदर्शनकारियों के भारी दबाव के आगे पुलिस बेबस हो गई थी और सुरक्षा नियंत्रण छिन गया था। इस चूक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए गृह मंत्री ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की, जिसे राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अस्वीकार कर दिया। राष्ट्रपति ने कहा कि इस समय इस्तीफे से ज्यादा पुलिस बल और व्यवस्था में सुधार करने की आवश्यकता है।
घटना के बाद राष्ट्रपति मैक्रों ने एक वीडियो संदेश जारी कर उग्र प्रदर्शनकारियों को 'लुटेरा' करार दिया। उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि गणतंत्र को लूटने और देश की व्यवस्था को क्षति पहुँचाने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा। फ्रांसीसी पुलिस के अनुसार, इस पूरे उपद्रव के दौरान अब तक लगभग 2,500
प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
1500 से ज्यादा दुकानों पर हमले और लूटपाट
फ्रांस 24 की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान अराजक तत्वों ने देश भर में 1,500 से अधिक दुकानों और मॉल पर हमले किए। सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो वायरल हुए हैं जिनमें प्रदर्शनकारी बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल और दुकानों का शटर तोड़कर सामान लूटते हुए दिखाई दे रहे हैं। सरकार का कहना है कि उपद्रव के कारण हुए कुल आर्थिक नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
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क्यों नाराज हैं लोग? मैक्रों सरकार के खिलाफ क्यों भड़का गुस्सा?
इस राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन की शुरुआत मूल रूप से देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग के साथ हुई थी। वामपंथी दलों और छात्र संगठनों का आरोप है कि फ्रांस के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में वर्तमान में औसतन 24 बच्चों पर एक शिक्षक है, यानी एक शिक्षक को 24 बच्चों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।
इसके अलावा, स्कूलों की जर्जर इमारतें, क्षमता से अधिक भरे हुए क्लासरूम (ओवरक्राउडेड क्लासेज) और शिक्षा से जुड़ी अन्य बुनियादी समस्याओं के खिलाफ छात्र लंबे समय से आवाज उठा रहे थे, जो अब इस बड़े और हिंसक जनआंदोलन में तब्दील हो चुका है।
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