वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ जारी मौजूदा संघर्ष ‘बहुत जल्द’ समाप्त हो जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई है कि युद्ध के पूरी तरह खत्म होने के बाद अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिलेगी। केंटुकी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकानों के खिलाफ पूर्व में किए गए अमेरिकी सैन्य हमलों का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने कहा कि इन सामरिक अभियानों ने ईरान की परमाणु क्षमताओं और महत्वाकांक्षाओं को काफी हद तक बेअसर और कमजोर कर दिया है।
ट्रंप ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने जनता से सवाल किया कि क्या ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करना सही कदम था, और इसके जवाब में खुद कहा कि तेहरान के पास परमाणु हथियार बिल्कुल नहीं होने चाहिए, क्योंकि वह उनका विध्वंसकारी इस्तेमाल कर सकता है।
ईरान की मांग: सभी मोर्चों पर तुरंत रुके युद्ध
दूसरी ओर, ईरान ने क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए सभी मोर्चों पर संघर्ष को पूरी तरह समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया है। ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने चेतावनी दी है कि यदि क्षेत्र के किसी भी हिस्से में लड़ाई जारी रहती है, तो यह व्यापक और खतरनाक संघर्ष को और लंबा खींच सकती है।
ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी 'आईआरएनए' (IRNA) के अनुसार, खतीबजादेह ने लेबनान में इजरायल के सैन्य अभियानों को तुरंत समाप्त करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि लेबनान का मुद्दा अमेरिका के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत के मुख्य विषयों में शामिल रहा है। हाल ही में बेरूत पहुंचे खतीबजादेह ने वहां के संसद अध्यक्ष नबीह बेरी, प्रधानमंत्री नवाफ सलाम और विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें कीं, जिन्हें उन्होंने सकारात्मक बताया। उनका मानना है कि लेबनान और व्यापक लेवांत क्षेत्र की सुरक्षा स्थितियां आपस में जुड़ी हुई हैं।
अमेरिका और इजरायल पर समझौते के उल्लंघन का आरोप
ईरानी उप विदेश मंत्री ने अमेरिका और इजरायल पर ईरान तथा लेबनान के खिलाफ हमले करके 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन' का उल्लंघन करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि लेबनान में युद्धविराम सुनिश्चित करने के अमेरिकी प्रयास अब तक विफल साबित हुए हैं। खतीबजादेह ने दावा किया कि इजरायल अपने वादों पर खरा नहीं उतरेगा और उसे लगाम लगाने की मुख्य जिम्मेदारी अमेरिका की है। हालांकि, इन दावों और समझौतों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
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संप्रभुता की रक्षा और होर्मुज स्ट्रेट खोलने की पेशकश
ईरानी अधिकारियों ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया और दावा किया कि वाशिंगटन उनकी वायु रक्षा प्रणाली तथा जवाबी कार्रवाई की ताकत को पूरी तरह नष्ट करने में असफल रहा है। ईरान का कहना है कि वह अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है और अपनी संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही, तेहरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) और अमेरिका के सवालों का जवाब देने की अपनी मंशा दोहराई है, और अपने शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के पक्ष में IAEA की 15 से अधिक रिपोर्टों का हवाला दिया है।
सबसे बड़ा कूटनीतिक मोड़ लेते हुए ईरान ने रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को सात दिनों के भीतर फिर से खोलने की पेशकश की है। तेहरान ने स्पष्ट किया कि वह युद्ध नहीं चाहता, लेकिन उस पर थोपे गए किसी भी संघर्ष का कड़ा मुकाबला करेगा। वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम इस मार्ग पर तनाव कम होने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को बड़ी राहत मिल सकती है।
फिलहाल, राष्ट्रपति ट्रंप के युद्ध जल्द समाप्त होने के दावों के बावजूद, पश्चिम एशिया में स्थायी शांति इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच सैन्य टकराव पूरी तरह रुक पाता है या नहीं।
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