रांची।झारखंड के गढ़वा जिले में भंडरिया थाना क्षेत्र में 26 जून 2018 को लैंड माइंस धमाका और हमला करके झारखंड जगुआर के छह जवानों को मारने वाला और पांच अन्य जवानों को जख्मी करने वाला कुख्यात अमन गंझू ने बुधवार को IG रांची के कार्यालय में सरेंडर कर दिया।





मूल रूप से बिहार के औरंगाबाद जिले के ढिबरा थाना क्षेत्र के झरना गांव का अमन गंझू उर्फ अनिल गंझू उर्फ प्रमुख सिंह भोक्ता उर्फ काजू भोक्ता भाकपा माओवादियों के संगठन में रीजनल कमांडर व बूढ़ा पहाड़ का आतंक रहा है।अमन गंझू पर झारखंड सरकार ने 15 लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था।बुधवार दोपहर अमन गंझू IG रांची के ऑफिस में IG अमोल वी. होमकर,IG रांची पंकज कंबोज,DIG एसटीएफ अनूप बिरथरे और CRPF के अन्य अधिकारियों के सामने सरेंडर कर दिया।सरेंडर करने के बाद अमन गंझू ने अपने भटके हुए अन्य साथियों से अपील की है कि वे भी हिंसा का रास्ता छोड़कर सरकार की आत्मसमर्पण नीति का लाभ उठाएं और मुख्य धारा से जुड़ें।





सरेंडर के मौके पर अमन गंझू ने कहा कि सितंबर महीने में झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ ने बूढ़ा पहाड़ पर नक्सल विरोधी अभियान आपरेशन आक्टोपस चलाया। इस अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने बूढ़ा पहाड़ को नक्सलियों से खाली करवा दिया। तब अमन गंझू दस्ते में लगभग 30 नक्सली थे। अभियान चलता देख, सभी लातेहार के नेतरहाट इलाके में भाग चुके हैं। उसने सुरक्षा बलों से संपर्क साधा और सरेंडर कर दिया।





अमन गंझू ने बताया कि लगभग 18 साल पहले 2004 में वह नक्सली बना था। उसका परिवार में जमीन विवाद चल रहा था, जिसे सुलझाने के लिए ही उसने नक्सलियों से संपर्क साधा था। तब उसके गांव में नक्सलियों का आना-जाना था। नक्सल संगठन में जुड़ने के बाद जमीन का विवाद तो नहीं सुलझा, लेकिन वह नक्सली जरूर बन गया।उसकी सक्रियता के चलते नक्सली संगठन में उसका कद बढ़ता चला गया।





भाकपा माओवादियों के बिहार रीजनल कमेटी (बीआरसी) के अंतर्गत कोयल शंख जोन के शीर्ष नेता और एक करोड़ के इनामी अरविंद की दो साल पहले मौत के बाद वह माओवादी संगठन का विस्तार करने में जुटा रहा। अमन गंझू के अनुसार उसके दो बच्चे हैं, जो पढ़ाई करते हैं। बूढ़ा पहाड़ पर सुरक्षा बलों की दबिश के बाद उसे हर दम मारे जाने का भय सताने लगा। अपने बच्चों और परिवार की खातिर उसने हथियार डालना उचित समझा और सरेंडर किया।





अमन गंझू को बहुत जल्द हजारीबाग के खुली जेल में शिफ्ट करने की कार्रवाई शुरू होगी,जहां अमन गंझू अपने परिवार के साथ रह सकेगा। सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत अमन गंझू पर रखी गई 15 लाख रुपए इनाम की राशि उसे दे दिए गए हैं।अन्य सारी सुविधाओं की प्रक्रिया अब शुरू हो जाएगी।





अमन गंझू के खिलाफ बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र वाले दो जिले गढ़वा और लातेहार में 17 मामले दर्ज हैं।जिसमें गढ़वा जिले के भंडरिया में नौ और रमकंडा थाने में एक मामला दर्ज हैं‌।लातेहार जिले के बारेसाढ़ थाने में दो, महुआडांड में दो, छिपादोहर थाने में एक इसके अलावा चंदवा और लातेहार थाने में एक-एक मामला दर्ज है।





आपरेशन आक्टोपस के बाद बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र को सुरक्षा बलों ने नक्सल मुक्त कराते हुए गढ़वा जिलांतर्गत बूढ़ा पहाड़ की चोटी पर झालुडेरा में और लातेहार जिला अंतर्गत तिसिया और नावाटोली में तथा झारखंड की सीमा से सटे छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिलांतर्गत पुंदाग में सुरक्षा बलों का कैंप लग गया।





पुलिस ने नक्सलियों के एलएमजी रायफल सहित कुल 17 हथियार, हजारों की संख्या में कारतूस, ग्रेनेड और आइईडी बरामद किया। इस अभियान ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी। नक्सली जान बचाने के लिए पलायन करने के लिए विवश हुए। पुलिस की बढ़ती दबिश के साथ-साथ नक्सलियों के संगठन के आंतरिक शोषण एवं भयादोहन से क्षुब्ध होकर कई नक्सलियों ने पुलिस से संपर्क साधा और मुख्य धारा से जुड़ने की इच्छा जताई है। अमन गंझू का सरेंडर करना भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है। अब भी कई अन्य नक्सली पुलिस के संपर्क में हैं और सरेंडर करने की तैयारी कर रहे हैं।





रीजनल कमांडर अमन गंझू के सरेंडर के मौके पर IG अभियान अमोल वी. होमकर ने कहा कि तीन साल में झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ ने मिलकर नक्सलियों की कमर तोड़ दी है। इस दरम्यान सुरक्षा बलों ने 1300 से अधिक नक्सलियों को गिरफ्तार किया, जिसमें पोलित ब्यूरो सदस्य, सेंट्रल कमेटी सदस्य से लेकर सदस्य तक शामिल हैं।





इसी प्रकार कुल 47 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें इस वर्ष अब तक 13 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इन तीन वर्षों में सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में 30 नक्सलियों को मार भी गिराया है, इनमें इस वर्ष मारे गए नक्सलियों की संख्या दस हैं। पुलिस का अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने भटके हुए नक्सलियों से अपील की है कि वे भी सरकार की आत्मसमर्पण नीति का लाभ उठाकर आत्मसमर्पण कर परिवार के साथ बेहतर जिंदगी जिएं या फिर मुठभेड़ में पुलिस की गोली खाएं।