प्रतिनिधि,रांची।मेदांता रांची के डॉक्टरों ने 32 वर्षीय युवक की सर्वाइकल स्पाइनल कैनल स्टेनोसिस का सफल ऑपरेशन किया।युवक को लंबे समय से गर्दन में दर्द की समस्या आ रही थी।उसके हाथ में कमजोरी और चलने फिरने में काफी दिक्कत आ रही थी। मरीज ने कई डाक्टरों से इलाज करवाने की कोशिश की,जिससे दर्द कुछ वक्त के लिए कम और ठीक हो जाता था,लेकिन इससे आराम नहीं मिलता था।आखिर में मरीज मेदांता रांची पहुंचा।जहां डाक्टरों ने उसकी समस्या को सुना और उसकी स्थिति को देखते हुए एमआरआई कारवाई, जिसकी रिर्पोट में पाया गया कि मरीज को सर्वाइकल स्पाइनल कैनल स्टेनोसिस की समस्या है।
सर्वाइकल स्पाइनल कैनल स्टेनोसिस एक हड्डी की बीमारी है, जिसमें गर्दन के स्तर पर स्पाइनल कैनाल का संकुचन होता है। रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ने से सर्वाइकल स्पाइनल कैनल स्टेनोसिस होता है।यह अधिक खतरनाक हो सकता है। सर्वाइकल स्पाइनल कैनाल स्टेनोसिस से शरीर बहुत कमजोर हो जाता और लकवा जैसे गंभीर लक्षण हो सकते हैं।
मेदांता रांची के न्यूरो सर्जन डॉक्टर आनंद कुमार झा ने बताया कि यह एक मुश्किल स्थिति थी, क्योंकि हल्की सी भी चूक मरीज को जिंदगी भर के लिए लकवा ग्रसित कर सकती थी या उसे वेंटिलेटर पर ला सकती थी। उन्होंने बताया कि रीढ़ की हड्डी का आघात स्टेनोसिस का कारण बन सकता है,लेकिन आमतौर पर यह लोगों के उम्र बढ़ने के साथ शरीर में होने वाले बदलावों के कारण होता है। मरीज के कम उम्र को देखते हुए डाक्टरों ने माइक्रो स्कोपिक सर्जरी की, जिससे मरीज को आराम मिलेगा। मेदांता रांची के न्यूरो सर्जन डॉक्टर आनंद कुमार झा ने बताया कि इस ऑपरेशन में न्यूरो एनेस्थीसिया के डॉक्टर मनोज और फिजियोथेरेपी डॉक्टर मतीन का अहम योगदान था। सभी ने लगातार मरीज की हर गतिविधियों पर ध्यान दिया ताकि उसकी रिकवरी आसानी से हो जाए।
इस ऑपरेशन को सफल बनाने में न्यूरो सर्जरी,न्यूरो एनेस्थीसिया और फिजियोथेरेपी का योगदान था। यह ऑपरेशन करीब 4 घंटे तक चला।इस तरह का केस इतने कम उम्र में काफी कम देखने को मिलते हैं।
मेदांता हॉस्पिटल के हॉस्पिटल डायरेक्टर विश्वजीत कुमार ने बताया कि हमारे अस्पताल में बेहतरीन डॉक्टर की टीम है जो मरीज़ को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करती है।





