रांची।झारखंड की राजधानी रांची के लोगों के लिए राहत देने वाली खबर है।शनिवार रात एक बजे शासन-प्रशासन के आदेश पर इंटरनेट सेवा चालू कर दी गई।शुक्रवार को जुमे के बाद राजधानी रांची के मेन रोड इलाके में एकरा मस्जिद के पास जमकर हुई हिंसा और उपद्रव के कारण सुरक्षा एहतियात के तहत इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई थी।रविवार को रेलवे भर्ती बोर्ड और एनटीपीसी की परीक्षा देने के लिए बड़ी संख्या में परीक्षार्थी दूसरे शहरों से रांची पहुंचे हैं।इंटरनेट चालू होने से सभी ने राहत की सांस ली।आज दोनों परीक्षाएं शहर के विभिन्न केंद्रों में आयोजित हो रही हैं। वहीं परीक्षा केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा की व्यवस्था की गई है। शनिवार की रात्रि एक बजे के बाद इंटरनेट सेवा चालू होने से हिंसा से डरे लोगों के चेहरे खिल गए है।इस बीच अर्द्धसैनिक बलों का संवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैग मार्च जारी है। रांची के रिम्स में इलाज करा रहे हिंसा के घायलों की हालत पहले से बेहतर बताई गई है। मेन रोड, डेली मार्केट के हालात तेजी से सुधर रहे हैं।
राजधानी रांची में शुक्रवार को जुमे के बाद भारी बवाल के दौरान पत्थरबाजी और गोलीबारी में दो लोगों की मौत और दो दर्जन से अधिक लोगों के घायल होने की घटना के दोषियों की पहचान पुलिस सीसीटीवी फुटेज, तस्वीरों और वीडियो के माध्यम से करने में जुटी रही है। पुलिस ने कुछ उपद्रवियों की पहचान कर लिए जाने के संकेत भी दिए हैं। रांची पुलिस आज कुछ दोषियों को गिरफ्तार भी कर सकती है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर रांची हिंसा की उच्च स्तरीय जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। रांची के सिटी एसपी के नेतृत्व में एसआईटी हिंसा, उपद्रव, उत्पात और फायरिंग की गहन जांच कर रही है।
रांची के डेली मार्केट के पास हिंसा, उपद्रव के मामले में मुस्लिम समाज कानूनी लड़ाई की रणनीति बना रहा है। पुलिस की फायरिंग की घटना पर सवाल उठाते हुए पुलिस-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलने की संभावना है। बरहाल कोई भी संगठन किसी तरह की कार्रवाई की बात को लेकर सामने नहीं आया है। मुस्लिम संगठन के प्रमुख धर्मगुरुओं की प्रतिक्रिया यह संकेत दे रही कि वे पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ हैं। चूंकि उनकी प्रतिक्रिया में फायरिंग पर सवाल नजर आ रहा।
एक दिन पहले ही एकरा मस्जिद के इमाम डा. मौलाना ओबैदुल्लाह कासमी ने अपने बयान में बताया है कि एकरा मस्जिद की ओर से किसी भी तरह का प्रोटेस्ट निकाले जाने की न कोई घोषणा की गई थी न ही मस्जिद से कोई ऐलान या सहयोग ही किया गया। उन्होंने कहा था कि गुरुवार को ही उन्होंने प्रोटेस्ट निकाले जाने से मनाही का बयान जारी किया था। अंजुमन इस्लामियां सहित अन्य संगठनों व संस्थाओं ने भी प्रोटेस्ट मार्च निकाले जाने की कोई घोषणा नहीं किए जाने की बात कही है।
एकरा मस्जिद के इमाम सहित अन्य धर्मगुरू और समाज के लोगों के बीच ऐसी चर्चा है कि प्रोटेस्ट निकालने नहीं दिए जाने को लेकर जिम्मेदारों ने पुलिस को सूचित किया था।जबकि किसी भी छोटे या बड़े संगठनों की ओर से प्रोटेस्ट मार्च की घोषणा नहीं की गई थी। कहा जा रहा है कि प्रशासन ने बिना अनुमति प्रोटेस्ट मार्च निकलने दिया। उसमें समाज का ऐसा कोई भी प्रबुद्ध व्यक्ति नहीं था। इसके बावजूद पुलिस उन्हें निकालने दिया। जुलूस में शामिल लोगों के अनियंत्रित होने के बाद नियंत्रित करने के उपाय के बावजूद फायरिंग पर सवाल उठाया जा रहा।
पुलिस-प्रशासन की इस कार्रवाई के खिलाफ समाज के लोगों की गोपनीय बैठकें चल रही। बैठक कर प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ कानूनी दांव-पेंच पर चर्चे हो रहे। इनमें कानूनी जानकारों को भी शामिल किया जा रहा। बैठक के जरिए कोर्ट, पुलिस सहित सक्षम स्तर पर जाने की रणनीति बन रही है।





