संपादक की कलम से
विकास की रफ्तार तेज करने की कवायद
संदर्भ : हेमंत सोरेन सरकार के तीन साल का कार्यकाल
सुमन कुमार
रांची।हेमंत सोरेन सरकार के कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे हो गए। आज के ही दिन (29दिसंबर,2019) को हेमंत सोरेन ने झारखंड की सत्ता का बागडोर संभाला। उस समय हेमंत सोरेन सरकार के समक्ष चुनौतियों का अंबार लगा था, लेकिन वह एक परिपक्व राजनीतिज्ञ की तरह चुनौतियों का सामना करते हुए, बाधाओं को चीरते हुए आगे बढ़ते रहे। वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण काल के दौरान झंझावातों से जूझते हुए उन्होंने जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप अपने कर्तव्यों का बखूबी निर्वहन किया। कोरोना काल के दौरान विदेशों में फंसे भारतीय मजदूरों के सकुशल स्वदेश वापसी में हेमंत सोरेन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।झारखंड सरकार ने राज्य हित में स्थानीयता नीति एवं आरक्षण बिल पारित कराया।
यह सर्वविदित है कि विपरीत परिस्थितियों में भी साहस, धैर्य व संयम का परिचय देते हुए राज्य की जनता के प्रति तीन वर्षों के दौरान श्री सोरेन बखूबी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में सफल रहे हैं। एक परिपक्व राजनेता की भांति सत्ता में शामिल सहयोगी दलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर उन्होंने मिसाल पेश की है। नतीजतन यूपीए गठबंधन की मजबूती बरकरार है।
मुख्यमंत्री बनने के पूर्व हेमंत सोरेन ने झारखंड की जनता से कई वादे किए थे। उन वादों को निभाने के प्रति वह सदैव तत्पर रहे हैं। जन आकांक्षाओं के अनुरूप राज्य में विकास की रफ्तार तेज करने की दिशा में भी उन्होंने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिसका सकारात्मक परिणाम सामने आया है।
जनता को मूलभूत सुविधाएं (पानी, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य व शिक्षा आदि) उपलब्ध कराने के प्रति उनका समर्पण साफ झलकता है। इससे इन्कार नहीं किया जा सकता कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के तीन वर्षों के कार्यकाल में झारखंड में विकास की गति तेज हुई है। सर्वांगीण विकास का सपना साकार करने में हेमंत सोरेन सरकार की उपलब्धियां खुद ब खुद हकीकत बयां करती है।
हेमंत सोरेन के सत्ता संभालते ही झारखंड में वैश्विक महामारी का कहर प्रारंभ हो गया। संपूर्ण मानवता के लिए यह चुनौती भरा समय रहा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी दूरदर्शिता से इन चुनौतियों का सामना करते हुए राज्य की जनता के प्रति अपने कर्तव्यों का बखूबी निर्वहन किया।इस दौरान बेरोजगारी दूर करने, महिला सशक्तिकरण, किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार, जनता को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने सहित जनहित के अन्य कार्यों को गति देने में हेमंत सोरेन सफल रहे।
सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों में पनपते नक्सलवाद पर काबू पाने में भी उन्हें सफलता मिली। उग्रवादी घटनाओं में काफी कमी आई। नक्सलियों की नकेल कसने में सरकार सफल रही। समाज से भटके युवाओं को मुख्यधारा में लाने और उनके लिए रोजगार सुजन करने के प्रति भी हेमंत सोरेन सरकार की उपलब्धियां सराहनीय है। पारा शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविकाओं की समस्याओं के समाधान की दिशा में भी सरकार ने सकारात्मक पहल की है। अनुबंध पर नियुक्त किए गए कर्मियों के समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए भी कदम उठाए गए हैं। यह राज्य हित में सरकार की प्रतिबद्धता का परिचायक है।सरकारी विभागों में रिक्तियों को भरने के लिए भी हेमंत सोरेन सरकार ने कदम उठाया है।तीन वर्षों में झारखंड की सूरत में बदलाव दिखा है। वर्ष 2019 के अंतिम दिनों में झारखंड सरकार ने शपथ ली थी।
हेमंत सोरेन दूसरी बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने। पहली बार वे 2013 में झारखंड के मुख्यमंत्री बने थे। उस समय 17 महीने तक वे झारखंड के मुख्यमंत्री रहे थे। उस दौरान भी अपने 17 महीने के कार्यकाल में उन्होंने झारखंड को पटरी पर लाने का प्रयास किया था। कई विभागों में रिक्तियों को भरने के लिए संचिकाओं को गति दी थी। राज्य की विविध समस्याओं के निदान के लिए सार्थक प्रयास भी किया।दूसरी बार हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री बनने के बाद झारखंड की जनता की फिर से उम्मीदें जगी। हेमंत सोरेन जन आकांक्षाओं के अनुरूप कदम बढ़ाते गए। वे सकारात्मक सोच के साथ झारखंड की जनता के लिए कुछ करना भी चाहते हैं। झारखंड की उन्हें समझ भी है। उनके पिता व राजनीतिक गुरु शिबू सोरेन ने झारखंड आंदोलन में महती भूमिका निभाई थी। उन्होंने अपने पिता से राजनीति के गुर सीखे। पिता के संग झारखंड का भ्रमण करते रहे। जन समस्याओं से रूबरू होते रहे।उनके नेतृत्व में झारखंड सरकार में जितने मंत्री हैं, सभी झारखंड के विकास के लिए तत्पर हैं। इससे विकास का पहिया तेज हुआ है। झारखंड की मूलभूत समस्याएं सड़क, पानी, बिजली और स्वास्थ्य आदि के क्षेत्र में आशातीत सुधार दिखने लगा है।
विधायिका और कार्यपालिका के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी वे सफल रहे हैं। हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी सरकार ने विकास की नई लकीर खींची है। उनके सहयोगी मंत्रियों के साथ तालमेल बहुत ही बेहतर हैं। वे हमेशा मंत्रियों के साथ वार्ता करते रहते हैं। मंत्री परिषद की बैठकें, हर विभागों की समीक्षा आदि करते हुए देखे जाते हैं। झारखंड में आरक्षण को लेकर हेमंत सोरेन की सरकार प्रतिबद्ध दिखती है। उन्होंने पिछली सरकार की आरक्षण नीति का पुरजोर विरोध किया था। हेमंत सोरेन सरकार ने नई स्थानीयता नीति एवं आरक्षण नीति पारित किया है। यह राज्य सरकार की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए नये मेडिकल कॉलेजों की स्थापना का निर्णय एक सार्थक पहल है। सदर अस्पतालों का पुनरुद्धार किया जाने का निर्णय स्वागतयोग्य है।बहरहाल, हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार ने तीन वर्षों में जनहित के कार्यों को जो गति प्रदान की है, इसके आधार पर यह उम्मीद जताई जाती है कि यह सरकार पांच वर्ष का अपना कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरे करेगी।





