विशेष रिपोर्ट / नई दिल्ली

संसद में पेश किए जाने वाले 'विदेशी फंडिंग संशोधन विधेयक, 2026' (FCRA Amendment Bill, 2026) को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने केंद्र सरकार के इस कदम की तीखी आलोचना करते हुए इसे भारतीय राज्य और नागरिक समाज (Civil Society) के बीच के संबंधों को मौलिक रूप से बदलने की एक "खतरनाक कोशिश" करार दिया है।

एक अंग्रेजी समाचार पत्र में प्रकाशित अपने विशेष लेख में थरूर ने आरोप लगाया कि यह विधेयक स्वतंत्र आवाजों को दबाने, कार्यपालिका की शक्तियों का केंद्रीकरण करने और गैर-लाभकारी संस्थाओं को कमजोर करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है।

"एनजीओ और थिंक-टैंक को विकास साझेदार के बजाय निशाना बनाया जा रहा"

शशि थरूर ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा सरकार ने देश के विकास में योगदान देने वाली गैर-लाभकारी संस्थाओं (NGOs), थिंक-टैंक और मानवाधिकार समूहों को साझेदार मानने के बजाय उन्हें "विदेशी हेरफेर और विध्वंस का स्रोत" बनाकर पेश करना शुरू कर दिया है।

"इन आवाजों को दबाने के लिए सरकार ने अंतरराष्ट्रीय परोपकार पर उनकी निर्भरता को निशाना बनाया है। यह नियंत्रण का एक ऐसा अभूतपूर्व तंत्र पेश करता है, जो पारंपरिक कानूनी सुरक्षा को ही दरकिनार कर देता है।"
शशि थरूर (कांग्रेस सांसद)

विदेशी फंडिंग में 87% की भारी गिरावट, हजारों संगठन बंद होने के कगार पर

थरूर ने ध्यान दिलाया कि एफसीआरए (FCRA) के नियमों को पहले ही काफी सख्त बना दिया गया है। आक्रामक प्रवर्तन और कड़े संशोधनों के कारण संस्थाओं पर प्रशासनिक और अनुपालन संबंधी बोझ अत्यधिक बढ़ गया है:

  • जटिल पाबंदियां: जमीनी स्तर के संगठनों को उप-अनुदान (Sub-granting) देने पर प्रतिबंध, प्रशासनिक खर्चों में कटौती और सभी विदेशी फंड के लिए नई दिल्ली की एक ही बैंक शाखा को अनिवार्य करना जैसी शर्तें पहले ही लागू हैं।
  • 87 फीसदी की गिरावट: इन नियमों के चलते विदेशी वित्तपोषण (Foreign Funding) में 87 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे हजारों धर्मनिरपेक्ष और समुदाय आधारित संगठनों को अपना काम बंद करने पर मजबूर होना पड़ा है।

संपत्ति जब्ती और धार्मिक-शैक्षणिक संस्थानों पर मंडराता संकट

प्रस्तावित विधेयक 2026 में प्रावधान है कि यदि किसी संगठन का एफसीआरए पंजीकरण रद्द, आत्मसमर्पण या समाप्त होता है, तो सरकार द्वारा नामित प्राधिकरण उसकी विदेशी अंशदान से बनी संपत्तियों और फंड का प्रबंधन संभालेगा।

इस पर चिंता जताते हुए थरूर ने केरल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि ईसाई धर्मार्थ संस्थाओं और ट्रस्टों ने एक सदी से भी अधिक समय से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य किया है। लेकिन इस प्रकार के दंडात्मक कानूनी तंत्र इन ऐतिहासिक संस्थानों को अस्थिर करने का काम करेंगे, जिससे लाखों लाभार्थियों का नुकसान होगा।

थरूर ने इस विधेयक को पूरी तरह से "लोकतंत्र विरोधी" करार देते हुए सभी विपक्षी दलों से संसद में एकजुट होकर इसका पुरजोर विरोध करने का आह्वान किया है।