विशेष संवाददाता,रांची/नई दिल्ली।विश्व मात्स्यिकी दिवस के अवसर पर राजधानी दिल्ली के चाणक्यपुरी में सुषमा स्वराज भवन में मत्स्यपालन,पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया।आयोजित कार्यक्रम में मत्स्य विभाग के पदाधिकारियों ने भाग लिया।गौरतलब है कि 21 नवम्बर को पूरे विश्व में विश्व मात्स्यिकी दिवस मनाया जाता है।
कार्यक्रम का थीम इंडियाज ब्लू ट्रांसफारमेशन स्ट्रेन्देनिंग स्माॅल स्केल एंड सस्टेनेबल फिशरीज रखा गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मात्स्यिकी पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने किया। इस अवसर पर विभिन्न देशों के राजदूत,हाई कमिशनर्स और फूड एंड एग्रीक्लचर आर्गनाइजेशन,रोम के प्रतिनिधिगण के साथ साथ विभिन्न राज्यों के निदेशक और पदाधिकारीगण शमिल हुए।
इस अवसर पर मत्स्य विभाग झारखंड से संजय कुमार गुप्ता, उप मत्स्य निदेशक रेवती हंसदा,सहायक मत्स्य निदेशक, रजनी गुप्ता,मत्स्य प्रसार पदाधिकारी दुर्गेश मिश्रा, स्टेट प्रोग्राम मैनेजर आशीष तिर्की, जिला डाटा एमआईएस मैनेजर उपस्थित थे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बताया कि हमारे देश में करीब तीन करोड़ मछुआरे है। देश की सामाजिक एवं आर्थिक उन्नति में इन मछुआरों का बहुत बड़ा योगदान है। यह प्रधानमंत्री के सोच का परिणाम है कि मात्स्यिकी को तीव्र गति से विकास करने के लिये अलग मंत्रालय का वर्ष 2019 में गठन किया गया। इसी प्रयास का फल है कि भारत पूरे विश्व में मछली उत्पादन में दूसरे स्थान पर आ गया है, परन्तु बहुत सारी चुनौतियां आज भी है। आज भी हमारे मछुआरे असंगठित क्षेत्र में है। मंत्रालय का प्रयास है कि इस सेक्टर को आर्गेनाईज किया जाय, जिसके लिये ऑनलाईन पंजीकरण किया जा रहा है। इस हेतु नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण किया जा रहा है।
किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री सामुहिक दुर्घटना बीमा योजना, ये सब कार्य बहुत तेजी से किये जा रहे है।
राजीव रंजन सिंह ने कहा कि भारत, बांगलादेश, श्रीलंका और मालद्वीव मिलकर समुद्र में मछली पकड़ने का एक ड्रफ्ट नीति भी बनायी गई है। जलीय समुद्री पौधों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही मात्स्यिकी गतिविधियों से जुड़े लोगों का जनगणना कार्य प्रारंभ किया जा रहा है। कार्बन उर्त्सजन को कम करने हेतु एसओपी तैयार किया गया है। मंत्रालय का संकल्प है कि महासागर एवं नदियों को स्वच्छ बनाया जाए तथा सत्त मत्स्य उत्पादन हेतु तकनीकी को बढ़ावा देते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
बता दें कि राजधानी रांची के धुर्वा स्थित मत्स्य किसान प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे विभिन्न जिलों के मत्स्य कृषकों ने भी विश्व मात्स्यिकी की दिवस का ऑनलाइन प्रसारण देखा।
विश्व मात्स्यिकी दिवस पर आयोजित समारोह में सागर मेहरा, (भाप्रसे) संयुक्त सचिव मात्स्यिकी मंत्रालय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। इस अवसर पर मंत्री एसपी सिंह बघेल, केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, जार्ज कूरियन, राज्य मंत्री (मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी और अल्पसंख्यक मामले), अभिलाक्ष लिखी, भाप्रसे, सचिव, मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी विभाग भारत सरकार, नीतू प्रसाद, भाप्रसे, संयुक्त सचिव (मेरिन फिशरीज), भारत सरकार, विजय बेहरा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एनएफडीबी, हैदराबाद, डाॅ. जेके जेना, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक (मत्स्य पालन), मेनुअन बेरानजे, एडीजी, एफएओ, विभिन्न देशों के राजदूत, हाई कमिशनर्स और अन्य पदाधिकारी गण उपस्थित थे।





