देशभर में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया को लेकर देश की राजनीति में एक नया और बड़ा घमासान छिड़ गया है। SIR के तीसरे चरण में अब तक 6 करोड़ से अधिक और पूरी प्रक्रिया के दौरान कुल 11 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काटे जा चुके हैं। इन चौंकाने वाले आंकड़ों के सामने आने के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है।

खरगे का तीखा हमला: "जहाँ फायदा वहाँ नाम जोड़े, जहाँ नुकसान वहाँ काटे"

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर एक विस्तृत पोस्ट शेयर करते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग एक निष्पक्ष संस्था की तरह काम करने के बजाय "भाजपा की कुर्सी बचाओ आयोग" की तरह काम कर रहा है।

खरगे ने आरोप लगाते हुए कहा:

"भाजपा को जहाँ फायदा दिखता है, वहाँ रातों-रात नए वोटर जोड़ दिए जाते हैं और जहाँ नुकसान की आशंका होती है, वहाँ बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काट दिए जाते हैं। यह लोकतंत्र को बंदी बनाने और सीधे तौर पर वोट चोरी करने की साजिश है।"

कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा पेश किए गए राज्यों के आंकड़े

मल्लिकार्जुन खरगे ने तीन प्रमुख राज्यों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग और सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं:

  • महाराष्ट्र: लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच अचानक 39 लाख नए मतदाता जोड़े गए, लेकिन अब SIR की ड्राफ्ट सूची से 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम बाहर कर दिए गए हैं।
  • पश्चिम बंगाल: बंगाल में SIR के दौरान जिन मतदाताओं के नाम काटे गए थे, उनमें से 91% नाम अपील के बाद वापस जोड़ने पड़े। खरगे ने सवाल उठाया कि क्या चुनाव के वक्त ये नाम जानबूझकर हटाए गए थे?
  • दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनावों से ठीक पहले मतदाता बढ़ाए गए और अब 47.56 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से गायब हैं। इसके अलावा 33 लाख अन्य मतदाताओं को नोटिस भेजने की तैयारी चल रही है।

तेलंगाना और कर्नाटक में भी 'चालबाजी' का आरोप

कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों में भी कांग्रेस कार्यकर्ता रोज इस तरह की चुनावी चालबाजी का सामना कर रहे हैं।

अपने बयान के अंत में खरगे ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए लिखा कि देश की जनता अब इस 'वोट चोरी' के खेल को समझ चुकी है। लोकतंत्र को कमजोर करने की इस साजिश का जनता आने वाले चुनावों में मुंहतोड़ जवाब देगी।