कानपुर।इत्र कारोबारी पीयूष जैन के घर से भले ही अरबों रुपए, किलो में सोना-चांदी बरामद हुआ हो,लेकिन पड़ोसियों और उन्हें जानने वालों को अभी भी भरोसा नहीं हो रहा है कि इतना साधारण दिखने वाले पीयूष के घर से इतना खजाना मिला है।लोगों का कहना हैं कि पीयूष जैन बेहद साधारण तरीके से रहते थे। कई बार शादियों, बर्थडे पार्टी या किसी अन्य बड़े समारोहों में भी वह हवाई चप्पल और कुर्ता-पैजामा पहनकर पहुंच जाते थे। गाड़ियों की बात करें तो पीयूष जैन के पास एक कानपुर नंबर की और एक कन्नौज के नंबर की बेहद साधारण सी दिखने वाली दो ही कारें हैं। ऐसे में किसी के लिए भी ये अंदाजा लगाना मुश्किल था कि पीयूष अकूत संपत्ति के मालिक हैं और उनके घर में नोटों के बंडल, सोना-चांदी भरा पड़ा है।पीयूष जैन की गिरफ्तारी हो चुकी है। आज कोर्ट में पेशी के बाद उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर अहमदाबाद ले जाया जा सकता है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कन्नौज में पीयूष जैन का पुश्तैनी घर है।पीयूष के पूर्वज कई पीढ़ियों से कन्नौज में ही रहते आए हैं।पीयूष के पिता महेश चंद्र जैन पेशे से केमिस्ट हैं।महेश ने ही दोनों बेटों पीयूष और अंबरीष को इत्र और खाने-पीने की चीजों में मिलाए जाने वाले एसेंस बनाने का तरीका सिखाया है।पीयूष के परिवार के पास जैन स्ट्रीट के मौजूदा मकान का एक छोटा सा हिस्सा ही था। पीयूष और उनके परिवार को जानने वाले बताते हैं कि पीयूष के परिवार की आर्थिक हालत पिछले 15 साल में पूरी तरह बदल गई।इसके बाद पीयूष ने आसपास के दो मकानों को खरीदकर एक में मिला दिया। कहा जा रहा है कि करीब 700 वर्ग गज के इस मकान को बनवाने के लिए जयपुर से कारीगर बुलवाए गए थे। हालांकि, इतना बड़ा कारोबार, घर में इतना कैश और सोना चांदी होने के बावजूद बावजूद घर के किसी भी बाहरी हिस्से में एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं लगाया गया है।

आपको बता दें कि पीयूष जैन और उनके भाई अंबरीष जैन के 6 बेटे-बेटियां हैं और ये सभी कानपुर में पढ़ते हैं। कन्नौज के छिपट्टी मोहल्ले के लोगों का कहना है कि भले ही बाहरी लोग पीयूष और उसके परिवार की हैसियत का अंदाजा नहीं लगा पाए, लेकिन कन्नौज में व्यापार से जुड़े लोगों में पीयूष और अंबरीष का नाम पूरे सम्मान से लिया जाता है।