नई दिल्ली:

संसद का मानसून सत्र 2026 गुरुवार, 13 अगस्त को लगातार हंगामे और गतिरोध के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। पूरे सत्र के दौरान चंदा चोरी, जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन व लाठीचार्ज तथा FCRA बिल जैसे तमाम मुद्दों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार तीखी बहस और नारेबाजी देखने को मिली।

पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च (PRS Legislative Research) के आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे सत्र में दोनों सदनों का अधिकांश समय हंगामे की भेंट चढ़ गया, जिससे करदाताओं के लगभग 175 करोड़ रुपये बर्बाद हो गए।

दोनों सदनों की उत्पादकता में भारी गिरावट

  • लोकसभा (19% प्रोडक्टिविटी): लोकसभा का प्रदर्शन सबसे चिंताजनक रहा। तय 114 घंटों के मुकाबले सदन में केवल 17 घंटे 30 मिनट ही कामकाज हो सका, जबकि 96 घंटे 30 मिनट का बहुमूल्य समय हंगामे के कारण नष्ट हो गया।
  • राज्यसभा (39.17% प्रोडक्टिविटी): उच्च सदन में भी लगभग 114 घंटे के निर्धारित समय में से केवल 37 घंटे 20 मिनट ही कार्यवाही चल सकी और लगभग 76 घंटे 40 मिनट का समय बर्बाद हुआ।

संसदीय प्रश्नों और प्रस्तावों पर भी इसका सीधा असर पड़ा। उदाहरणस्वरूप, राज्यसभा में सदस्यों द्वारा पूछे जाने वाले 285 प्रश्नों में से केवल 16 प्रश्नों के ही उत्तर दिए जा सके।

हंगामे के बीच पारित हुए 12 महत्वपूर्ण विधेयक

सदन में चर्चा के पर्याप्त अवसर न मिलने और निरंतर व्यवधान के बावजूद सरकार ने दोनों सदनों से 12 महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराया:

  1. सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक
  2. राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण विधेयक
  3. जन्म-मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक
  4. सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक
  5. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) विकास विधेयक
  6. कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक
  7. बैंकर्स बुक्स साक्ष्य विधेयक
  8. ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक
  9. केरल राज्य नाम परिवर्तन विधेयक
  10. राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) संशोधन विधेयक
  11. खान और खनिज (विकास और विनियमन) यानी MMDR संशोधन विधेयक

किस विधेयक पर कितनी हुई चर्चा?

विधेयकों को पारित तो कर दिया गया, लेकिन कई अहम कानूनों पर लोकसभा में कुछ ही मिनटों की नाममात्र चर्चा हो सकी:

  • सर्वाधिक चर्चा: एंटी-चीटिंग बिल (सार्वजनिक परीक्षा विधेयक) पर दोनों सदनों में सबसे लंबी बहस हुई—लोकसभा में 10 घंटे 55 मिनट और राज्यसभा में 6 घंटे 39 मिनट (कुल 17 घंटे 34 मिनट)।
  • सीमित बहस: सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या बढ़ाने वाले बिल, केरल नाम परिवर्तन बिल, जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रेशन बिल तथा एमएसएमई बिल जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को लोकसभा में महज 3 से 5 मिनट की चर्चा के बाद पारित कर दिया गया, जबकि राज्यसभा में इन पर 1 से 2 घंटे तक बहस हुई।

सत्र के अंतिम दिन भी दोनों सदनों में गतिरोध समाप्त नहीं हो सका और अंततः अनिश्चितकाल के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी गई।