प्रतिनिधि,गिरीडीह। सम्मेद शिखर पारसनाथ को तीर्थ क्षेत्र घोषित करने की दिशा में केंद्र व राज्य सरकार के निर्णय के खिलाफ मंगलवार को मधुबन से पारसनाथ पर्वत तक आदिवासी-मूलवासियों ने रैली प्रदर्शन किया।मरांग बुरु सांवता सुसार बैसी व आदिवासी- मूलवासी संघर्ष मोर्चा की अगुवाई में मरांग बुरु बचाओ जन आक्रोश रैली निकाली गई।हजारों की संख्या में आदिवासी-मूलवासी प्रदर्शनकारी अपने साथ पीएम नरेंद्र मोदी, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन व गिरिडीह के झामुमो विधायक सुदिव्य साेनू का पुतला दहन कर नारेबाजी की।रैली के दौरान पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था कर रखी थी।एएसपी हारिश बिन जमां व एसडीएम प्रेमलता मुर्मू के नेतृत्व में पुलिस प्रशासन पूरी तरह चौकन्ने थे।
मधुबन बाजार समेत आने-जाने वाले मार्ग, पारसनाथ पहाड़ पर भारी संख्या में सशस्त्र व लाठी बल की तैनाती की थी। कार्यक्रम में सालखन मुर्मू,गीताश्री उरांव,लोबिन हेम्ब्रम व जयराम महतो मुख्य रूप से पहुंचे।उन्होंने जमकर हुंकार भरी।पारसनाथ बचाओ महाजुटान अभियान में अलग अलग जिलों से आदिवासी समाज के लोग पहुचे थे। 25 जनवरी तक मरांगबुरु स्थल घोषित करने की मांग की गयी,जहां गीताश्री उरांव ने आदिवासियों के धरोहर के रूप में मधुबन स्थित पारसनाथ पर्वत मरांग बुरु की रक्षा किए जाने की बात कही। वही सालखन मुर्मू ने कहा कि आदिवासी समाज के लोगों को अपने कुरीतियों, रूढ़िवादिता, अशिक्षा नशापान आदि से अलग हो आंदोलन को तेज करना होगा, तभी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
इधर बोरियो विधायक लोबिन हेंब्रम ने आगामी 24 फरवरी को मरांगबुरु को बचाने के पक्ष में झारखंड बंद का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इस मांग को विधानसभा में उठाया जाएगा तथा विधानसभा का आगामी सत्र चलने नहीं दी जाएगी। हेंब्रम आदिवासी समुदाय को अपने आदिवासी भाषा में संबोधित करते हुए कहा कि पारसनाथ पर्वत पर पूजा दर्शन करने आने वाले लोगों का स्वागत है किंतु यहां वे लोग एकाधिपत्य जमाने का प्रयास करने वाले लोगों को तथा उनके दलालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
एक साथ कई आदिवासी संगठन के साथ कई गैर आदिवासी संगठन के नेताओं ने बड़े स्तर पर जुलूस प्रदर्शन किया और पहाड़ पर करीब एक किलोमीटर ऊपर चढ़कर आदिवासियों के पूजन स्थल दिशोम मांझी थान में मोदी सरकार, हेमंत सरकार के साथ साथ सदर विधायक सोनू के खिलाफ नारेबाजी की।मधुबन के फुटबाल मैदान से निकले विशाल जुलुस में हजारों की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग शामिल थे। सभी मधुबन बाजार में प्रदर्शन करते हुए पहाड़ पर पहुंचे और तीनों का पुतला दहन करने के बाद वापस लौट आए।
मधुबन थाना के निकट स्थित कार्यक्रम स्थल के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल तैनात थे। कार्यक्रम के समापन से पूर्व झारखंड खतियान संघर्ष समिति के नेता जयराम महतो के पहुंचने पर थोड़ी देर के लिए कार्यक्रम स्थल में विघ्न उपस्थित हो गया, क्योंकि उनके समर्थक नारेबाजी करते हुए पहुंचे।हालांकि जयराम महतो को सभास्थल में मंच पर बोलने का अवसर नहीं दिया गया।आंदोलन पूरी तरह से शांति पूर्ण रहा इससे प्रशासन ने राहत की सांस ली।





