रांची।झारखंड के मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन के लीज आवंटित करने और उनके करीबियों द्वारा शेल कंपनियों में निवेश करने के मामले में सीबीआई जांच कराने की मांग वाली याचिका की वैधता पर एक जून को झारखंड हाई कोर्ट सुनवाई करेगा।अदालत के आदेशानुसार मंगलवार 31 मई तक सभी पक्षों को अपना-अपना जवाब दाखिल कर देना है।अदालत ने कहा कि इसके बाद किसी पक्ष को कोई समय नहीं दिया जाएगा। 24 मई को झारखंड हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया था कि सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को पहले याचिका की वैधता पर सुनवाई करने को कहा है।





झारखंड उच्‍च न्‍यायालय ने सीएम हेमंत सोरेन की सीबीआई जांच के मामले में कहा कि न्याय और राज्य के हित में कोर्ट अवकाश में भी इसकी सुनवाई कर रही है। पूर्व में अदालत ने इस मामले में सरकार को कहा था कि उनकी ओर से याचिका की वैधता पर आपत्ति की सुनवाई करेगी। पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से आवेदन देकर चार सप्ताह बाद सुनवाई निर्धारित करने की मांग की गई थी। इस पर चीफ जस्टिस डा. रवि रंजन और जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह बहुत ही गंभीर मामला है। इसमें पहले ही बहुत समय दिया जा चुका है, इसलिए इतना लंबा समय नहीं दिया जा सकता है। इसके बाद अदालत ने मामले में एक जून को सुनवाई निर्धारित की। अदालत ने कहा कि 31 मई तक मामले से जुड़े सभी पक्ष अपना-अपना जवाब दाखिल कर दें। अदालत अब इस मामले में किसी को कोई समय नहीं देगी।





आपको बता दें कि सीएम सोरेन को पत्थर खनन पट्टा आवंटित करने और उनके करीबियों द्वारा शेल कंपनी में निवेश के खिलाफ हाई कोर्ट में प्रार्थी शिव शंकर शर्मा की ओर से जनहित याचिका दाखिल की गई है और इसके साथ ही खूंटी में मनरेगा घोटाले मामले में अरुण कुमार दुबे की याचिका पर भी सुनवाई हो रही है। पूर्व में हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर कहा था कि याचिका अभी सुनवाई के लिए स्वीकार भी नहीं की गई है और ईडी ने हाई कोर्ट कोर्ट में सीलबंद रिपोर्ट पेश कर दिया है। उक्त रिपोर्ट की प्रति सरकार को भी मिलनी चाहिए। बिना दस्तावेजों को सरकार इस मामले में जवाब दाखिल नहीं कर पाएगी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट को पहले याचिका की वैधता पर सुनवाई करने का निर्देश दिया है।





अवैध खनन व परिवहन के संगठित सिंडिकेट का प्रमुख है प्रेमप्रकाश





संताल परगना में अवैध खनन व परिवहन में राजनीति से जुड़ा एक संगठित सिंडिकेट सक्रिय है। इस सिंडिकेट का प्रमुख प्रेम प्रकाश है। इस सिंडिकेट में नौकरशाहों की भी भूमिका है। इसमें कन्हैया खुदानिया है जो छह खानों का मालिक हैं। बंगाल का सुब्रतो पाल और शिशिर पाल,ओम जायसवाल, बोदी सिंह और अन्य भी शामिल हैं।ये दावा शिव शंकर शर्मा का है।शिव शंकर ने झारखंड उच्च न्यायालय में मुखौटा कंपनियों से जुड़े मामले में दाखिल अपने पूरक हलफनामे में की है। शिव शंकर ने कुछ नौकरशाहों और राजनेताओं से संबंधित एक जनहित याचिका (4290/2021) दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया था कि शेल कंपनियों के माध्यम से ये राजनेता व नौकरशाह अपनी काली कमाई का निवेश किए हैं।

इसी जनहित याचिका पर झारखंड में पिछले कुछ दिनों से प्रवर्तन निदेशालय भी सक्रिय है।





शिव शंकर ने अपने हलफनामे में प्रेम प्रकाश के कुछ करीबी विश्वासपात्रों में नीरज, रणदीप झा, हरमू मुक्तिधाम निवासी राजीव सिंह उर्फ मंटू सिंह उनके चालक मंजीत और नीशू का नाम दिया है। शिव शंकर ने दाखिल हलफनामा में दावा किया है कि साहिबगंज और पाकुड़ में खनन माफिया अवैध रूप से खनन किए गए स्टोन चिप्स के परिवहन के लिए ट्रकों को जो कोड देते हैं। ये कोड उक्त इलाके में सक्रिय कुछ यौनकर्मियों के नाम पर होते हैं।





अपने सहयोगियों के नाम पर प्रेम प्रकाश ने हासिल किया कई कार्यों का अनुबंध





शिव शंकर ने हलफनामे में दावा किया है कि प्रेम प्रकाश ने अपने उपरोक्त सहयोगियों के नाम पर कई कार्यों का अनुबंध भी प्राप्त किया था। दावा है कि ये लोग मुख्यमंत्री आवास और कोलकाता निवासी अमित अग्रवाल के बीच एक कड़ी हैं। विभिन्न स्रोतों से एकत्र किए गए पैसे प्रेम प्रकाश और राजीव सिंह के आवास पर रखा जाता था। प्रवर्तन निदेशालय ने हाल ही में निलंबित आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल के खिलाफ चल रहे मनी लांड्रिंग मामले में अनुसंधान के क्रम में प्रेम प्रकाश के रांची, पटना, बनारस और सासाराम स्थित ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी।