रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चुनाव आयोग द्वारा भेजी गयी नोटिस पर अपना पक्ष पेश करने के लिए चार हफ्तों का समय मांगा था,लेकिन आयोग ने उन्हें 10 दिन का समय दिया है।सीएम सोरेन को माइनिंग लीज लेने के मामले में 20 मई तक आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा।पहले 10 मई तक जवाब देना था। सीएम सोरेन ने पांच अप्रैल को ही आयोग को भेजे गये आवेदन में समय बढ़ाने का आग्रह किया था। अपना आवेदन चुनाव आयोग को स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजा था।
समय बढ़ाने के लिए गिनाए तीन कारण
सीएम सोरेन ने आयोग से समय बढ़ाने के लिए तीन कारणों का उल्लेख किया है।उन्होंने आयोग से कहा है कि दो मई को नोटिस मिली है और 10 मई तक जवाब देने के लिए कहा गया था।इतने कम समय में अपना पक्ष सही तरीके से पेश करना संभव नहीं है। पत्र में कहा गया है कि आयोग ने अपनी नोटिस के साथ 600 पन्नों के उस दस्तावेज को भेजा है, जिसे मुख्य सचिव ने चुनाव आयोग को भेजा था।सभी दस्तावेज हिंदी में हैं और उनका पक्ष पेश करने वाले अधिवक्ताओं को इसे सही-सही समझने के लिए अंग्रेजी में इसका अनुवाद कराना जरूरी है।इसमें समय लगेगा।
मां की बीमारी का भी दिया हवाला
सीएम सोरेन ने इसके साथ ही अपनी मां की बीमारी का भी हवाला दिया है। उन्होंने पत्र में कहा है कि उनकी 67 वर्षीय मां पिछले आठ महीने से गंभीर रूप से बीमार हैं। 28 अप्रैल को उन्हें बेहतर इलाज के लिए हवाई मार्ग से रांची से हैदराबाद ले जाया गया। फिलहाल वह एआइजी हॉस्पीटल के आइसीयू में भर्ती हैं। उनके बेहतर इलाज और देखभाल के लिए उन्हें वहां रहना पड़ता है।
सीएम सोरेन ने आयोग को भेजे पत्र में खुद पर लगे आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि यह मामला काफी महत्वपूर्ण है। यह उनके राजनीतिक करियर और सामाजिक स्थिति को प्रभावित करने वाला है।समय की कमी के कारण अपना पक्ष पेश करने के लिए सक्षम वकीलों की नियुक्ति नहीं कर पाये हैं।





