प्रतिनिधि,जमशेदपुर।गुड़ाबांधा महेशपुर निवासी कान्हूराम मुर्मू ने 12 साल पहले ईसाई धर्म अपना लिया था।वहीं उन्हें शुक्रवार गांव के माझी बाबा और ग्रामीणों के सहयोग से वापस संताल समाज सरना धर्म में लाया गया।इस दौरान घर वापसी पर विचार मंथन बैठक का आयोजन भी किया गया था। जिसमें बतौर मुख्य अतिथि धाड़ दिशोम देश परगना बाबा बैजू मुर्मू,अतिथि तालसा माझी, बाबा दुर्गा चरण मुर्मू, नायक माझी, जादूनाथ हांसदा, देश प्रमाणिक, माधू सोरेन, गुड़ाबंधा महल प्रतिनिधि बुद्धेश्वर बास्के उपस्थित थे।
मौके पर देश परगना ने कहा कि हमारा संताल समाज सरना धर्म सभी समाज सभी धर्म से अलग है। हमारी संस्कृति, पूजा पद्धति, जन्म से मरण तक पारंपरिक रीति रिवाज दूसरे किसी भी समाज से बिल्कुल भिन्न है। हम प्रकृति के पुजारी हैं। पेड़, पर्वत, नदी, पानी, पत्थर और हमारे पूर्वज ही हमारे देवता हैं। हमारे ईस्ट देवी देवताओं के अपने अपने बली सुनिश्चित है। बलि के रूप मे मुर्गा, मुर्गी, बतख, भेड़, बकरा, बकरी, गाय, बैल, भैंस, सुअर आदि अर्पित करते है। हमारा धर्म सरना हैं। आज तक जो लोग आदिवासी संताल समाज सरना धर्म से किसी भी कारण से दूसरे समाज में गए हैं, वे सभी अपने पुराने घर वापस चले आएं। जिसके तहत सभी के घर वापसी में हम स्वागत करते हैं। अगर कोई घर वापसी नहीं करता है तो हम पहले भी कह चुके है कि राज्य व केंद्र सरकार धर्म बदल चुके लोगों को एसटी के आरक्षण समेत अन्य सरकारी लाभों से वंचित कर दें। कार्यक्रम में गांव के माझी बाबा रमाई सोरेन, नायके बाबा रोबिन सोरेन, प्रमाणिक, गोडेत, जोग माझी के नेतृत्व में काफी संख्या में महिला और पुरुष मौजूद थे।





