नई दिल्ली: भारतीय सुरक्षा बलों की मारक क्षमता और तकनीकी कौशल को और अधिक सुदृढ़ तथा अजेय बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने 4,106 करोड़ रुपए की कुल लागत वाले दो बड़े रक्षा समझौतों पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए हैं। इन महत्वपूर्ण सौदों का मुख्य केंद्रबिंदु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन ‘आत्मनिर्भर भारत’ और देश में स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना है।
इस नई डिफेंस डील के तहत भारतीय वायुसेना (IAF) को जहां अत्याधुनिक GSAT-7C संचार उपग्रह (Communication Satellite) की ताकत मिलेगी, वहीं भारतीय नौसेना (Indian Navy) के बेड़े में अचूक ‘वरुणास्त्र’ हेवी-वेट टॉरपीडो शामिल किए जाएंगे।
1. वायुसेना के लिए GSAT-7C सैटेलाइट: सुरक्षित और निर्बाध संचार
रक्षा मंत्रालय ने बेंगलुरु स्थित न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के साथ 2,563 करोड़ रुपए का अनुबंध किया है।
- क्या है यह प्रणाली: यह कोई आक्रामक हथियार नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना के लिए एक विशेष, सुरक्षित और समर्पित कम्युनिकेशंस सैटेलाइट प्रोजेक्ट है।
- रणनीतिक लाभ: इसके माध्यम से भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों, ड्रोन्स और अन्य सैन्य प्लेटफॉर्म्स के बीच ‘लाइन ऑफ साइट’ (Line of Sight) से परे भी पूरी तरह सुरक्षित और निर्बाध संचार स्थापित किया जा सकेगा।
- ऑपरेशनल क्षमता: यह उपग्रह आधुनिक ‘नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध’ (Network-Centric Warfare) की जरूरतों को पूरा करते हुए युद्ध के मैदान में सेना के अंगों के बीच सटीक तालमेल और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता को कई गुना बढ़ाएगा।
इसे भी पढ़ेंः राजनाथ सिंह की कड़ी चेतावनी: "पाकिस्तान से हुआ अगला आतंकी हमला तो मिलेगा पहले से भी कड़ा जवाब"
2. नौसेना का नया ब्रह्मास्त्र: ‘वरुणास्त्र’ हेवी-वेट टॉरपीडो
समुद्र के भीतर भारत की मारक क्षमता को अजेय बनाने के लिए 1,543 करोड़ रुपए का दूसरा बड़ा सौदा हैदराबाद की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ किया गया है।
- स्वदेशी डिजाइन: इसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की प्रतिष्ठित नौसेना विज्ञान और प्रौद्योगिकीय प्रयोगशाला (NSTL) द्वारा पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।
- पनडुब्बियों का काल: यह एक अत्याधुनिक, जहाज से लॉन्च की जाने वाली हेवी-वेट एंटी-सबमरीन टॉरपीडो है, जो गहरे और उथले दोनों तरह के समुद्रों में छिपी दुश्मन की किसी भी पनडुब्बी का सटीक और अचूक शिकार करने में पूरी तरह सक्षम है।
प्रमुख तकनीकी विशेषताएं:
- रेंज: लगभग 40 किलोमीटर तक मार करने की अचूक क्षमता।
- स्पीड: 40 नॉट (यानी करीब 74 किलोमीटर प्रति घंटा) की तीव्र रफ्तार।
- अकॉस्टिक होमिंग तकनीक: यह एडवांस्ड ध्वनि तरंगों के संकेतों के जरिए दुश्मन की पनडुब्बी का पीछा करती है और दुश्मन के डिफेंस काउंटरमेकर्स (धोखा देने वाले उपकरणों) को चकमा देकर अपने लक्ष्य को नेस्तनाबूद कर सकती है।
‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम
नई दिल्ली में रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और महानिदेशक (अधिग्रहण) ए. अनबरासु की गरिमामयी उपस्थिति में इन समझौतों को अंतिम रूप दिया गया। इन स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होने से रक्षा उपकरणों और सामरिक मामलों में विदेशी ताकतों पर भारत की निर्भरता काफी हद तक कम होगी।
इन समझौतों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत अब रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आयात पर निर्भर रहने के बजाय आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को तेजी से और सफलतापूर्वक हासिल कर रहा है।
ऊपर दिए गए वीडियो में इस रक्षा सौदे से जुड़ी विस्तृत जानकारी और सामरिक विश्लेषण को आसानी से देखा जा सकता है।
#AtmanirbharBharat #IndianDefence #Varunastra #GSAT7C #IndianAirForce #IndianNavy #MakeInIndia #DRDO #DefenceNews #Geopolitics





