नई दिल्ली।
आगामी 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है, लेकिन संसद के भीतर की सरगर्मी शुरू होने से पहले ही देश का सियासी पारा पूरी तरह चढ़ चुका है। इस बार सरकार की नजर सिर्फ बिलों की लंबी फेहरिस्त पर नहीं, बल्कि उन बड़े संविधान संशोधनों पर है जो देश की राजनीति की दशा और दिशा बदल सकते हैं। इसमें लोकसभा सीटों का गणित बदलने वाला परिसीमन, महिला आरक्षण, 'एक देश-एक चुनाव' और जेल जाने पर पीएम-सीएम को कुर्सी से हटाने वाला ऐतिहासिक बिल शामिल हैं। साफ है कि इस बार मानसून सत्र में विधायी कार्यों से ज्यादा सियासी बवाल देखने को मिल सकता है।
राजनाथ सिंह के दफ्तर में सत्ता पक्ष की बड़ी घेराबंदी
सत्र की शुरुआत से पहले शुक्रवार को सत्ता पक्ष ने संसद के भीतर विपक्ष को घेरने और फ्लोर मैनेजमेंट को मजबूत करने के लिए अपना 'होमवर्क' पूरा कर लिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कार्यालय में हुई इस बेहद अहम बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, किरेन रिजिजू के साथ-साथ सहयोगी दलों के प्रमुख नेता ललन सिंह और राम मोहन नायडू समेत दोनों सदनों के चीफ व्हिप मौजूद रहे।
इस बैठक का एजेंडा साफ था—संसद में न सिर्फ हंगामे को शांत करना है, बल्कि बड़े विधेयकों को पारित कराने के लिए जादुई आंकड़े (नंबर गेम) को भी चाक-चौबंद रखना है। सत्ता पक्ष के सांसदों का दावा है कि पिछले दिनों इन बिलों का विरोध करने की वजह से टीएमसी और डीएमके को राज्यों में नुकसान उठाना पड़ा था, इसलिए इस बार विपक्ष को संभलकर कदम उठाना चाहिए।
लोकसभा सीटों का बदलेगा भूगोल; 'जेल से सरकार' पर रार
सरकारी एजेंडे में सबसे ऊपर परिसीमन और महिला आरक्षण बिल हैं, जिससे लोकसभा की सीटों का पूरा ढांचा बदल जाएगा। इसके साथ ही 130वां संविधान संशोधन विधेयक भी विपक्ष के रडार पर है। इस प्रस्तावित कानून के तहत यदि कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री 30 दिन से अधिक समय तक जेल में रहता है, तो उसे अपनी कुर्सी गंवानी पड़ेगी। हालांकि, इस पर जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) की रिपोर्ट शुक्रवार को ही स्वीकृत होनी थी, लेकिन सत्ता पक्ष के भीतर से ही आए कुछ विरोधों के चलते फिलहाल इसे टाल दिया गया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह बहस सिर्फ कानून बनाने की नहीं, बल्कि इस नैतिक सवाल की भी होगी कि सरकार जेल से चलेगी या नहीं।
जोड़-तोड़ का गणित: 354 के जादुई आंकड़े पर नजर
पिछले सत्र में सरकार के पास परिसीमन जैसे बड़े संशोधनों के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा नहीं था, लेकिन इस बार अंकगणित बदल चुका है:
एनडीए का मजबूत आधार: वर्तमान में एनडीए के पास अपने करीब 298 सांसद हैं।
बागी गुटों का समीकरण: रणनीतिकारों की नजर टीएमसी के 20 बागी और उद्धव गुट के 6 सांसदों पर है, जिन्हें मिलाकर यह संख्या 324 तक पहुंच जाती है।
रणनीतिक लक्ष्य: इसके अलावा डीएमके के 22 और शरद पवार गुट की एनसीपी के 8 सांसदों की गतिविधियों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। यदि यह समीकरण बैठ गया, तो सत्ता पक्ष का आंकड़ा 354 तक पहुंच सकता है।
विपक्ष की भी पूरी तैयारी, विपक्षी एकता की होगी अग्निपरीक्षा
दूसरी ओर, विपक्ष ने भी सरकार को घेरने के लिए मुद्दों का तरकश तैयार कर लिया है। कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में परिसीमन बिल का कड़ा विरोध करने का निर्णय लिया गया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सर्वदलीय बैठक को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वहाँ सुनने वाले कम और अपनी मर्जी थोपकर फैसला करने वाले ज्यादा होते हैं।
विपक्ष ने बेरोजगारी, महंगाई, NEET पेपर लीक, FCRA संशोधन और खाद्य सुरक्षा कानून में बदलाव जैसे जनहित के मुद्दों की एक लंबी सूची तैयार की है। हालांकि, परिसीमन के मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन (INDIA) में अभी पूरी तरह एकराय नहीं दिख रही है; एनसीपी (शरद पवार गुट) की सुप्रिया सुले पहले ही सीटों को 50 फीसदी बढ़ाने वाले फॉर्मूले की वकालत कर चुकी हैं। ऐसे में संसद के भीतर जहाँ एक तरफ सरकार के नंबर गेम की परीक्षा होगी, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी एकजुटता की भी अग्निपरीक्षा होनी तय है। 19 जुलाई को होने वाली सर्वदलीय बैठक के बाद इस सियासी दंगल की तस्वीर और साफ हो जाएगी।





